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Assam Election Results 2026: गुरु को हराकर शुरू हुआ सफर, जानें जलुकबारी में हिमंत बिस्वा सरमा की प्रचंड जीत के मायने

Assam Election Results 2026: असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे सामने आ चुके हैं और एक बार फिर सबकी निगाहें जलुकबारी सीट पर टिक गईं. इस सीट से मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने लगातार छठी बार जीत हासिल कर अपनी पकड़ और मजबूत कर ली है. उन्होंने कांग्रेस उम्मीदवार बिदिशा नियोग को बड़े अंतर से हराया और करीब 89,434 वोटों की निर्णायक बढ़त बनाई.

जलुकबारी सीट को सिर्फ एक विधानसभा क्षेत्र नहीं, बल्कि असम की राजनीति का अहम केंद्र माना जाता है. गुवाहाटी के उत्तर-पश्चिम हिस्से में आने वाली यह सीट लंबे समय से राजनीतिक गतिविधियों का बड़ा मंच रही है. यह इलाका कामरूप मेट्रोपॉलिटन जिले का हिस्सा है और गुवाहाटी लोकसभा क्षेत्र के तहत आता है. 1967 में अस्तित्व में आई यह सीट आज भी राज्य की सबसे चर्चित सीटों में गिनी जाती है.

राजनीति का दिलचस्प इतिहास

जलुकबारी सीट पर अब तक 12 बार विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. यहां कांग्रेस ने सबसे ज्यादा पांच बार जीत दर्ज की है. वहीं भाजपा और निर्दलीय उम्मीदवारों को दो-दो बार सफलता मिली है. बाकी समय में जनता पार्टी और असम गण परिषद जैसे दलों का भी प्रभाव देखने को मिला.

लेकिन इस सीट की असली कहानी भृगु कुमार फुकन और हिमंत बिस्वा सरमा के इर्द-गिर्द घूमती है. कभी गुरु-शिष्य माने जाने वाले ये दोनों नेता बाद में राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन गए और इस सीट की सियासत को पूरी तरह बदल दिया.

1985 में भृगु फुकन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पहली जीत दर्ज की थी. वे असम आंदोलन से जुड़े बड़े चेहरों में रहे और बाद में राज्य के गृह मंत्री भी बने. राजनीतिक मतभेदों के बाद उन्होंने अलग राह चुनी और 1990 के दशक में भी चुनावी सफलता हासिल की.

सरमा का उदय और लगातार बढ़ता प्रभाव

2001 में हिमंत बिस्वा सरमा ने जलुकबारी सीट से जोरदार वापसी की और अपने राजनीतिक गुरु को मात दी. इसके बाद उन्होंने 2001, 2006 और 2011 में कांग्रेस के टिकट पर लगातार जीत दर्ज की. 2015 में भाजपा में शामिल होने के बाद भी उनका विजय अभियान नहीं रुका और 2016, 2021 के बाद अब 2026 में भी उन्होंने जीत का सिलसिला जारी रखा.

जलुकबारी सीट पर मतदाताओं की संख्या भी लगातार बढ़ रही है. 2026 में यहां 2,06,314 मतदाता दर्ज किए गए हैं. यह इलाका तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, जिसका असर चुनावी समीकरणों पर भी साफ दिखता है.

यहां का सामाजिक ढांचा भी काफी विविध है. हिंदू, मुस्लिम, अनुसूचित जाति और जनजाति के साथ मध्यम वर्गीय शहरी मतदाता भी बड़ी संख्या में मौजूद हैं. यही वजह है कि यह सीट हर चुनाव में अलग तरह की राजनीतिक चुनौती पेश करती है.

गुवाहाटी विश्वविद्यालय, असम इंजीनियरिंग कॉलेज और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण यह क्षेत्र ना सिर्फ शैक्षणिक बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.

ये भी पढ़ें- ‘अचानक नहीं मिली यह जीत…’ पीएम मोदी ने बताया बंगाल-असम में बीजेपी की सफलता का असली मंत्र

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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