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कितनी खास है रामलला को बंधने वाली मधुबनी राखी? श्रृंगेरी आश्रम से आएगा रक्षासूत्र; जानिए पौराणिक मान्यता

Raksha Bandhan 2025: कुछ दिन बाद राखी का त्यौहार आने वाला है. हर भाई और बहन का इसका बेसब्री से इंतजार हो रहा है. ठीक उसी तरह हमारे रामलला और उनकी बहन को भी राखी यानी रक्षाबंधन के त्यौहार का इंतजार है. अयोध्या के श्री राम मंदिर में द्वितीय प्राण प्रतिष्ठा के बाद राजा राम के साथ माता सीता और तीनों भाई के लिए पहला रक्षाबंधन का त्योहार अति विशिष्ट होने जा रहा है. श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के शुभ मुहूर्त पर बड़ी बहन शांता की ओर से आने वाली खास शैली की राखी भगवान राम और सभी भाइयों को बांधी जाएगी.

अयोध्या में Raksha Bandhan

भाई-बहन के प्रेम के इस पवित्र त्यौहार पर अयोध्या के रामलला को श्रृंगेरी आश्रम से बहन शांता द्वारा एक विशेष मधुबनी-मोती राखी बांधी जाएगी. यह राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि आस्था, कला और परंपरा का संगम है. आइये जानें इसकी पौराणिक मान्यता और मधुबनी शैली पर बनी जरी और मोतियों की राखियों की खासियत क्या है?

क्या है पौराणिक मान्यता?

भगवान राम के लिए यूं तो देशभर से भक्त अपने प्रेम और भक्ति के साथ राखी भेजते हैं. हालांकि, उनके लिए खास राखियां देशभर में बने श्रृंगेरी ऋषी आश्रम से आती हैं. इसमें से अयोध्या का और मधुबनी बिहार के आश्रम से खास राखियां भेजी जाती है. पौराणिक मान्यता है कि भगवान राम की बहन शांता की विवाह श्रृंगेरी ऋृषी से हुआ था. इसी कारण आज भी आश्रम और गांव की महिलाएं उनके बहन का प्रतिनिधित्व करते हुए राखी भेजती हैं. इन आश्रमों में शांता का मंदिर भी जरूर होता है.

मधुबनी जरी और मोती राखी की खासियत

यह राखी पारंपरिक मधुबनी कला और मोतियों से बनाई गई है जो इसे और भी खास बनाती है. मधुबनी कला, बिहार की एक प्राचीन लोक कला है जो अपनी सुंदरता और जटिल डिजाइनों के लिए जानी जाती है. इसमें प्रकृति, देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं को दर्शाया जाता है. इस राखी में मधुबनी कला से बनी छोटी-छोटी आकृतियां और रंग-बिरंगे मोती जड़े हुए हैं, जो इसकी खूबसूरती को चार चांद लगा देते हैं.

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चार दिवसीय आयोजन

अयोध्या के श्रृंगी ऋषि आश्रम से 6वें श्री रामलला रक्षाबंधन महोत्सव के तहत चार दिवसीय आयोजन संपन्न किए जाएंगे. इस आयोजन के तहत बहन शांता की ओर से राजा राम और उनके भाइयों के लिए राखी भेजी जाएगी.  शृंगी बाबा सेवा संस्थान के पदाधिकारी ने बताया कि पौराणिक मान्यता को निभाते हुए आश्रम की ओर से रक्षासूत्र कारसेवकपुरम पहुंचेगा.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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