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‘मारकाट से लेकर जिंदा जलाने की धमकी और ममता का खूनी आतंक..’, बंगाल चुनाव में जीतकर भी कुछ यूं छलका भाजपा प्रत्याशी का दर्द

bengal election latest news: पश्चिम बंगाल में आज जब बीजेपी 200 के जादुई आंकड़े की ओर बढ़ रही है, तो जश्न के बीच एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने पूरे देश को रुला दिया. दरअसल पश्चिम बर्दवान की बाराबनी सीट पर जैसे ही बीजेपी प्रत्याशी अरिजीत रॉय की जीत का एलान हुआ, बूथ स्तर के कार्यकर्ता सुजॉय गोराई फूट-फूटकर रोने लगे. यह आंसू किसी नेता के नहीं बल्कि उस ज़मीनी कार्यकर्ता के थे, जिसने हर चुनाव के बाद अपनी जान बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाईं.

जीत के बाद बिलख कर क्या बोले?(Barabani Election Result)

रुंधे गले से सुजॉय गोराई ने वो दास्तां सुनाई जो बंगाल की राजनीति का काला सच (bengal election violence ) रही है. उन्होंने कहा कि हर बार जब चुनाव खत्म होते थे, टीएमसी के लोग हमें और हमारे परिवारों को मारने ढूंढते थे. जीत के बाद हमें अगले 15 दिन जंगलों में या दूर रिश्तेदारों के घर छिपकर रहना पड़ता था. हमारा कसूर सिर्फ इतना था कि हम ‘कमल’ के लिए खड़े थे. आज सुजॉय के ये आंसू बंगाल में टीएमसी के ‘पॉलिटिकल टेरर’ (राजनैतिक आतंक) की विदाई का सबसे बड़ा प्रमाण हैं.

 

बाराबनी: जहां लोकतंत्र को लहूलुहान किया गया

बाराबनी और आसपास के इलाके सालों से राजनीतिक हिंसा (bengal election violence ) का गढ़ रहे हैं. यहां विपक्षी कार्यकर्ताओं के घरों को जलाना, उनकी खेती उजाड़ना और उन्हें सामाजिक बहिष्कार (Boycott) का शिकार बनाना टीएमसी के ‘सिंडिकेट’ का मुख्य हथियार था. आज अरिजीत रॉय की जीत ने उस सिंडिकेट की कमर तोड़ दी है. बीजेपी ने बाराबनी को सिर्फ एक सीट नहीं, बल्कि ‘भयमुक्त बंगाल’ का प्रतीक बना दिया है.

बलिदान की जीत: हजारों ‘सुजॉय’ के संघर्ष का फल

बीजेपी प्रवक्ताओं का कहना है कि बंगाल की यह सुनामी उन कार्यकर्ताओं के बलिदान का नतीजा है, जिन्होंने 2021 के विधानसभा चुनाव और 2023 के पंचायत चुनाव में अपने साथियों को खोते देखा था. आज जब बंगाल के नक्शे पर 193 से 200 सीटों का भगवा रंग दिख रहा है, तो यह सुजॉय जैसे उन कार्यकर्ताओं को समर्पित है जिन्होंने ‘मार खाकर भी हार नहीं मानी’.

बंगाल में ‘शांति का नया सवेरा'(bengal Result Update)

अमित शाह और जेपी नड्डा ने साफ कर दिया है कि बीजेपी की सरकार बनते ही बंगाल में ‘बदला’ नहीं बल्कि ‘बदलाव’ आएगा. केंद्रीय सुरक्षा बलों (CRPF) की 500 कंपनियां अभी भी तैनात हैं ताकि सुजॉय जैसे किसी भी कार्यकर्ता को इस बार अपना घर न छोड़ना पड़े. यह जीत संकेत है कि बंगाल में अब ‘बम और गोली’ की जगह ‘कलम और विकास’ की बात होगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Rohit Agrawal

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