उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेजर जनरल (रिटायर्ड) भुवन चंद्र खंडूरी का मंगलवार को निधन हो गया. 91 वर्ष की आयु में देश के इस सच्चे सपूत के विदा होने से राजनीतिक और सैन्य जगत में शोक की लहर दौड़ गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा करते हुए गहरा दुख व्यक्त किया.
पीएम ने कहा कि सशस्त्र बलों से लेकर राजनीतिक पटल तक खंडूरी जी का योगदान अमूल्य था और देशभर में कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के उनके प्रयासों को कभी भुलाया नहीं जा सकता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पूर्व सीएम को याद करते हुए लिखा कि खंडूरी जी हमेशा उत्तराखंड के विकास के लिए समर्पित रहे, जो मुख्यमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल में साफ तौर पर दिखाई दिया. पीएम ने उनके केंद्रीय मंत्री रहने के दौरान किए गए देशव्यापी कार्यों, खासकर बुनियादी ढांचे और सड़कों के नेटवर्क (कनेक्टिविटी) को मजबूत करने के अथक प्रयासों की जमकर सराहना की. पीएम मोदी ने शोक संतप्त परिवार और उनके लाखों समर्थकों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त की हैं.
भुवन चंद्र खंडूरी का जीवन अनुशासन और ईमानदारी की एक खुली किताब रहा. भारतीय सेना के ‘मेजर जनरल’ के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा था. वे देश के उन गिने-चुने नेताओं में से थे जिनकी सादगी और निष्पक्षता के विरोधी भी कायल थे.
जब उत्तराखंड में भाजपा ने उन्हें मुख्यमंत्री की कमान सौंपी, तो उन्होंने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाकर भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार किया. राज्य के निर्माण और उसे विकास की मुख्यधारा से जोड़ने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही.
अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में भुवन चंद्र खंडूरी ने केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ी थी. देश के चारों कोनों को जोड़ने वाली महत्वाकांक्षी ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ (Golden Quadrilateral) और राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना (NHDP) को धरातल पर उतारने का श्रेय उन्हीं को जाता है. समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ सड़कों का जाल बिछाने की उनकी इसी सैन्य कार्यशैली के कारण उन्हें देश का ‘हाईवे किंग’ भी कहा जाने लगा था.
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खंडूरी जी के निधन पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और धर्मेंद्र प्रधान समेत कई दिग्गजों ने शोक व्यक्त किया है. पौड़ी गढ़वाल से भाजपा सांसद अनिल बलूनी ने उनके निधन को राष्ट्र के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए कहा कि उन्होंने सुशासन और ईमानदार राजनीति के उच्च आदर्श स्थापित किए. उनकी सादगी और सिद्धांतों के प्रति अटूट प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी. पूरा उत्तराखंड आज अपने इस ‘ईमानदार कमांडर’ को नम आंखों से विदाई दे रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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