पीएम मोदी की नॉर्वे यात्रा के दौरान भारत और नॉर्वे ने विज्ञान और तकनीक साझेदारी को मजबूत करते हुए पांच बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर किए. ये समझौते ग्रीन एनर्जी, सतत विकास, समुद्री तकनीक, नवाचार और भू-विज्ञान सहयोग जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित हैं. इन समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच संस्थागत सहयोग मजबूत करना, उद्योग और स्टार्टअप भागीदारी बढ़ाना, शैक्षणिक सहयोग को बढ़ावा देना और सतत विकास परियोजनाओं को तेजी देना है.
सबसे अहम समझौतों में से एक डीएसआईआर/सीएसआईआर (काउंसिल ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च) और नॉर्वे की रिसर्च काउंसिल ऑफ नॉर्वे (RCN) के बीच हुआ, जिसके तहत रिसर्च, टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट, इनोवेशन और क्षमता निर्माण में सहयोग बढ़ाया जाएगा. समझौते में संयुक्त कार्यशालाएं, रिसर्च एवं डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स, वैज्ञानिकों के एक्सचेंज प्रोग्राम और जलवायु परिवर्तन, स्वच्छ ऊर्जा, समुद्री अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सहयोग की व्यवस्था शामिल है.
सीएसआईआर ने नॉर्वे की प्रमुख स्वतंत्र रिसर्च संस्था एसआईएनटीईएफ (SINTEF) के साथ 2026-2029 के लिए एक नया सहयोग समझौता भी किया. यह साझेदारी सर्कुलर इकोनॉमी और सस्टेनेबिलिटी ट्रांजिशन पर केंद्रित होगी. इसके तहत बायो-बेस्ड मैटेरियल, ओशन एनर्जी, ऑफशोर विंड, कार्बन कैप्चर और वेस्ट मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में संयुक्त रिसर्च होगी. एक अन्य महत्वपूर्ण समझौते के तहत सीएसआईआर संस्थानों ने SINTEF संस्थाओं के साथ समुद्री ऊर्जा और ऑफशोर विंड एनर्जी तकनीकों पर प्रोजेक्ट आधारित सहयोग समझौता किया. इस पहल के लिए सीएसआईआर लगभग 3.41 करोड़ रुपए की फंडिंग सहायता देगा.
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इसके अलावा, “ग्रीन शिफ्ट के लिए विज्ञान, तकनीक और नवाचार सहयोग” शीर्षक से एक संयुक्त घोषणा पत्र पर भी हस्ताक्षर किए गए. यह समझौता सीएसआईआर, एकेडमी ऑफ साइंटिफिक एंड इनोवेटिव रिसर्च (AcSIR) और नॉर्वेजियन यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (NTNU) के बीच हुआ. इसके तहत छात्र और फैकल्टी एक्सचेंज, संयुक्त रिसर्च गतिविधियां, अकादमिक सेमिनार और साझा शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे.
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