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डिजिटल दौर में क्यों उड़ रही है युवाओं की नींद? जोसेफ जाखर ने अपनी किताब ‘Designing Sleep’ में खोले राज

Designing Sleep Book Launch: अच्छी सेहत के लिए अच्छा खानपान और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतनी ही जरूरी है अच्छी नींद. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अच्छी नींद के लिए भी खास तैयारी की जरूरत होती है? आपका बेडरूम कैसा है, कमरे में कितनी रोशनी आती है, बिस्तर और आसपास का माहौल कैसा है और सोने से पहले आप क्या करते हैं, ये सभी बातें आपकी नींद को प्रभावित कर सकती हैं. इसी सोच को सामने रखते हुए दिल्ली में ‘Designing Sleep’ नाम की किताब लॉन्च की गई. इसके लेखक जोसेफ जाखर ने बताया है कि किस तरह अपने सोने के माहौल और रोजमर्रा की आदतों में बदलाव करके नींद को बेहतर बनाया जा सकता है.

दिल्ली में लॉन्च हुई ‘Designing Sleep’ किताब

राजधानी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) एनेक्सी में ‘Designing Sleep’ पुस्तक का विमोचन किया गया. बीडब्ल्यू बिजनेसवर्ल्ड के प्रधान संपादक अनुराग बत्रा की ओर से आयोजित कार्यक्रम में लेखक जोसेफ जाखर की किताब लॉन्च की गई. इस मौके पर डॉ. शशि दुबे समेत कई विशिष्ट अतिथि मौजूद रहे. किताब में बेहतर नींद और स्वस्थ जीवन के बीच संबंध को समझाया गया है. साथ ही बताया गया है कि किस तरह अपने आसपास के माहौल और आदतों में छोटे-छोटे बदलाव करके नींद की गुणवत्ता बेहतर की जा सकती है.

मां की बीमारी से मिली किताब लिखने की प्रेरणा

पेशे से सॉफ्टवेयर डिजाइनर जोसेफ जाखर के मुताबिक, इस किताब को लिखने का विचार उनके निजी अनुभव से आया. करीब सात साल पहले उनकी मां की तबीयत खराब हुई थी. इस दौरान उन्होंने महसूस किया कि नींद से जुड़ी समस्याएं इंसान की सेहत को किस तरह प्रभावित कर सकती हैं. इसके बाद उन्होंने नींद के विषय पर रिसर्च शुरू की.

एक डिजाइनर होने के नाते जोसेफ ने इस विषय को अलग नजरिए से समझने की कोशिश की. उन्होंने यह जानना चाहा कि कमरे की बनावट, आसपास का माहौल और रोजमर्रा की आदतें किसी व्यक्ति की नींद पर किस तरह असर डालती हैं. इसी रिसर्च के आधार पर उन्होंने ‘Designing Sleep’ किताब तैयार की.

बेडरूम की डिजाइन से भी प्रभावित होती है नींद

किताब में बताया गया है कि अच्छी नींद के लिए सिर्फ आरामदायक बिस्तर होना काफी नहीं है. बेडरूम का पूरा माहौल भी इसके लिए अहम है. कमरे की बनावट, खिड़की-दरवाजे, रोशनी, बिस्तर और यहां तक कि कपड़ों के रंग भी सोने के माहौल को प्रभावित कर सकते हैं.

इसके अलावा सोने से पहले मोबाइल और टीवी से दूरी बनाना भी जरूरी बताया गया है. देर रात तक स्क्रीन देखने और मानसिक तनाव के साथ बिस्तर पर जाने से नींद प्रभावित हो सकती है. ऐसे में सोने से पहले खुद को शांत रखना और आरामदायक माहौल तैयार करना बेहतर नींद के लिए मददगार हो सकता है.

सोने और जागने का समय तय करना भी जरूरी

कार्यक्रम में मौजूद The Indian School of Natural Spiritual Sciences की संस्थापक डॉ. शशि दुबे ने भी अच्छी नींद के लिए सही दिनचर्या और सकारात्मक सोच को अहम बताया. उनके मुताबिक, सोने से पहले मन को शांत रखना चाहिए और अगले दिन की चिंता लेकर बिस्तर पर नहीं जाना चाहिए.

उन्होंने रोजाना सोने और जागने का समय तय करने, पर्याप्त नींद लेने और सुबह जल्दी उठने जैसी आदतों पर ध्यान देने की बात कही. उनका मानना है कि दिनचर्या में नियमितता और सकारात्मक सोच बेहतर नींद के लिए जरूरी हैं.

डिजिटल जिंदगी में युवाओं की नींद पर बढ़ रहा असर

आज की डिजिटल जिंदगी में युवाओं की बदलती दिनचर्या भी नींद की समस्या की एक बड़ी वजह बन रही है. देर रात तक मोबाइल चलाना, क्लब जाना और काम या जिम के बीच व्यस्त रहना, इन सबके चलते कई लोग नींद के लिए पर्याप्त समय नहीं निकाल पाते. इसका असर उनकी मानसिक और शारीरिक सेहत पर पड़ सकता है.

‘Designing Sleep’ किताब में सात अलग-अलग पहलुओं के जरिए समझाया गया है कि किस तरह अपनी आदतों और सोने के माहौल में बदलाव करके बेहतर नींद हासिल की जा सकती है. कार्यक्रम में शोधकर्ता और डॉक्टर मालविका शर्मा समेत अन्य वक्ताओं ने भी नींद और स्वस्थ जीवन से जुड़े पहलुओं पर अपने विचार रखे.

ये भी पढ़ें- बिहार में बड़ा सियासी बवंडर, दो निर्दलीय MLC के बीजेपी में शामिल होते ही भड़के तेजस्वी, कहा- संविधान का उड़ रहा मजाक

कुल मिलाकर ‘Designing Sleep’ किताब का संदेश साफ है कि अच्छी नींद महज एक जरूरत नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियाद है. जिस तरह हम अपने दिन को बेहतर बनाने लिए योजना बनाते हैं, उसी तरह रात की नींद को भी बेहतर बनाने की तैयारी जरूरी है.

-भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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