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देसी दूल्हा, विदेशी बाराती और बैलगाड़ी की सवारी! राजस्थान के इस गांव में दिखी परंपरा की सबसे खूबसूरत तस्वीर

लग्जरी कारों और डेस्टिनेशन वेडिंग के इस दौर में पाली जिले के भादरास गांव ने परंपरा की एक खूबसूरत मिसाल पेश की है. गांव के बेटे सुरेश जणवा चौधरी ने अपनी शादी में आधुनिकता को पीछे छोड़ बैलगाड़ियों से बारात निकालकर साबित कर दिया कि जड़ें ही हमारी सबसे बड़ी पहचान हैं.

9 साल से शंघाई में, पर दिल में बसा है गांव

भादरास निवासी पुराराम जणवा चौधरी के पुत्र सुरेश पिछले करीब 9 वर्षों से चीन के शंघाई शहर में रहकर इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट का सफल व्यवसाय कर रहे हैं. विदेश की चमक-दमक और आधुनिक जीवनशैली को करीब से देखने के बावजूद सुरेश ने अपनी शादी के लिए पारंपरिक अंदाज ही चुना. उनका मानना था कि शादी जीवन का सबसे खास पल है और इसे अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति से जोड़कर ही यादगार बनाया जा सकता है.

7 बैलगाड़ियों में सजी बारात, 10 किमी का सफर

सोमवार को जब बारात भादरास गांव से निकली तो नजारा देखने लायक था. 7 सजी-धजी बैलगाड़ियों के साथ 10 सफारी गाड़ियां भी बारात में शामिल थीं. दूल्हा सुरेश जणवा पारंपरिक वेशभूषा में बैलगाड़ी पर सवार होकर सादड़ी होते हुए लगभग 10 किलोमीटर दूर मुंडारा गांव पहुंचे. पूरे रास्ते लोकगीतों की गूंज, ढोल-नगाड़ों की थाप और ग्रामीणों का हुजूम इस अनोखी बारात का स्वागत कर रहा था. गांव-गांव में लोग इस बारात को देखने के लिए घरों से बाहर निकल आए.

चीन से आए मेहमान, बोले- ‘अद्भुत अनुभव’

इस शादी की सबसे खास बात रही विदेशी मेहमानों की मौजूदगी. सुरेश के बिजनेस सहयोगी चीन के शंघाई से आए बिजनेसमैन होंगफंग अपने साथियों के साथ इस समारोह में शामिल हुए. बैलगाड़ी की सवारी, ग्रामीण परिवेश, पारंपरिक रीति-रिवाज और भारतीय आतिथ्य सत्कार देखकर विदेशी मेहमान अभिभूत हो गए. होंगफंग ने इसे अपने जीवन का बेहद खास और यादगार अनुभव बताया.

‘परंपराएं ही असली पहचान हैं’ – दूल्हा सुरेश जणवा

दूल्हे सुरेश जणवा चौधरी ने बताया,

“मैं 9 साल से शंघाई में हूं. वहां की आधुनिकता देखी है, लेकिन अपनी शादी में भारतीय संस्कृति को ही प्राथमिकता देना चाहता था. आजकल दिखावा बहुत बढ़ गया है, पर मुझे लगता है कि सादगी और परंपराओं में जो सुकून है वो कहीं और नहीं. परंपराएं ही हमारी असली पहचान हैं और इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी जिम्मेदारी है.”

मुंडारा गांव में विवाह की सभी रस्में पूरी तरह पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुईं. इस शादी ने न सिर्फ गांव वालों का, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोगों का दिल जीत लिया है. यह आयोजन साबित करता है कि आधुनिकता और परंपरा साथ-साथ चल सकते हैं, बस सोच बड़ी होनी चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस

नतांश पटेल

Crime and political journalist with 5+ years of experience, currently serving as Bureau In-Charge, Rajasthan at Bharat Express News Network. Known for leading editorial teams, delivering high-impact interviews, and driving audience growth through sharp content strategy.

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