Jagtar Singh Hawara Parole
Jagtar Singh Hawara Parole: पंजाब में विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही खालिस्तान का मुद्दा फिर से जोर पकड़ने लगा है. मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के हत्यारे जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की मांग की है. इसके लिए उन्होंने राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया को एक पत्र भी लिखा है. पत्र में उन्होंने हवारा की मां की तबीयत का हवाला दिया है. बता दें कि, हवारा उग्रवादी समूह बब्बर खालसा से जुड़ा हुआ आतंकी है.
बता दें कि, किसी भी अपराधी को पैरोल तभी दिया जा सकता है जब इसके लिए राज्यपाल की मंजूरी हो. सीएम भगवंत मान ने इसलिए राज्यपाल कटारिया को लेटर लिखा है.
उन्होंने पत्र में बताया कि हवारा की मां की तबीयत फिलहाल ठीक नहीं है. ऐसे में उनकी मां की देखभाल के लिए हवारा को कुछ दिनों की पैरोल दी जाए. जगतार सिंह हवारा पूर्व सीएम बेअंत सिंह की हत्या में दोषी है. इसी केस वो फिलहाल जेल में अपनी सजा काट रहा है.
बेअंत सिंह की 31 अगस्त 1995 में पंजाब सचिवालय के बाहर बम धमाके में हत्या कर दी गई थी. इस धमाके में पंजाब के तत्कालीन सीएम बेअंत सिंह समेत 17 लोगों की मौत हो गई थी. इन बम धमाके को दिलावर सिंह नाम के एक शख्स ने अंजाम दिया था. वह वहां आत्मघाती हमलावर के तौर पर वहां पहुंचा हुआ था. मामले की जांच और सुनवाई के बाद ट्रायल कोर्ट ने जगतार सिंह हवारा और बलवंत सिंह को फांसी की सजा सुनाई थी.
हालांकि बाद में हवारा की सजा में बदलाव किया गया. साल 2010 में उसकी फांसी की सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया. अदालत ने साफ किया था कि हवारा को पूरी जिंदगी जेल में ही रहना होगा. वहीं बलवंत सिंह की फांसी की सजा बरकरार रखी गई थी.
अब जगतार सिंह हवारा के लिए पैरोल की मांग को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा सकती है. खास तौर पर अगर राज्य सरकार या मुख्यमंत्री की तरफ से इस मामले में कोई पहल होती है, तो विपक्ष इसे बड़ा मुद्दा बना सकता है.
भारतीय जनता पार्टी पहले भी आम आदमी पार्टी सरकार पर कट्टरपंथी तत्वों के प्रति नरम रुख अपनाने के आरोप लगाती रही है. ऐसे में हवारा की पैरोल से जुड़ा कोई भी फैसला राजनीतिक विवाद को और बढ़ा सकता है.
बेअंत सिंह हत्याकांड पंजाब के सबसे चर्चित और सनसनीखेज मामलों में गिना जाता है. उस दौर में पंजाब लंबे समय तक आतंकवाद और हिंसा से जूझ चुका था, इसलिए मुख्यमंत्री की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था.
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भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते हैं. वह भी कई बार खालिस्तानी समर्थक तत्वों को लेकर कड़ा रुख अपनाते रहे हैं और पंजाब में ऐसे संगठनों या लोगों को बढ़ावा दिए जाने के आरोप लगाते रहे हैं. ऐसे में जगतार सिंह हवारा की पैरोल का मुद्दा केवल कानूनी मामला बनकर नहीं रह सकता. आने वाले दिनों में इसके राजनीतिक असर भी देखने को मिल सकते हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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