सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा दिए गए सीबीआई जांच के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है. इस फैसले के बाद पूर्व राजस्व मंत्री रामलाल जाट, सुरेश जाट और एडीजी आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव के खिलाफ अब सीबीआई जांच नहीं होगी.
यह आदेश शिकायतकर्ता परमेश्वर रामलाल जोशी के लिए झटके के रूप में देखा जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद शिकायतकर्ता समेत अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलील दी कि राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा सीबीआई जांच का आदेश देना अनुचित था, क्योंकि राज्य पुलिस इस मामले की निष्पक्ष जांच करने में पूरी तरह सक्षम है. उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच केवल असाधारण परिस्थितियों में होनी चाहिए और इसे नियमित विकल्प नहीं बनाया जा सकता.
राज्य सरकार ने कोर्ट में रखी अपनी बात
राज्य सरकार ने कोर्ट में कहा कि राजस्थान हाई कोर्ट ने यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिया कि राज्य पुलिस पक्षपाती है या जांच में अक्षम है. इसके अलावा, हाई कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा 362 और बीएनएसएस की धारा 403 का उल्लंघन किया, जो किसी अंतिम आदेश को संशोधित करने की अनुमति नहीं देती.
सॉलिसिटर जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता परमेश्वर रामलाल जोशी को कई बार जांच अधिकारी द्वारा बुलाया गया, लेकिन उसने बयान दर्ज नहीं कराया. इसके अलावा, उसने अपने हस्ताक्षर का नमूना देने से भी इनकार कर दिया, जिससे आरोपों की पुष्टि नहीं हो पाई.
सुरेश जाट और अरविंद श्रीवास्तव को राहत
सुप्रीम कोर्ट में कथित आरोपी सुरेश जाट की ओर से विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी, जिसमें उनकी ओर से पूर्व एडिशनल सॉलिसिटर जनरल मनिंदर सिंह ने दलीलें रखीं. अदालत ने पाया कि एडीजी आनंद श्रीवास्तव के भाई अरविंद श्रीवास्तव को बिना किसी ठोस आधार के फंसाया गया था, ताकि इस मामले को सीबीआई जांच के लिए सौंपने का कारण बनाया जा सके.
पुराना विवाद, 2003 से चल रहा मामला
यह मामला भीलवाड़ा की खदानों में व्यापारिक साझेदारी से जुड़ा हुआ है, जो 2003 से लंबित है. खनन कंपनियों के स्वामित्व, शेयरहोल्डिंग और वित्तीय लेन-देन को लेकर पहले भी कई एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं. मौजूदा एफआईआर में आरोप लगाया गया कि 2018 से 2021 के बीच एक रेंट एग्रीमेंट की जालसाजी की गई थी, लेकिन यह एफआईआर 2024 में दर्ज की गई.
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब राज्य पुलिस अपनी जांच जारी रखेगी और मामले की निष्पक्ष जांच को सुनिश्चित करेगी.
-भारत एक्सप्रेस