Dhar Bhojshala Dispute Resolved: ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाली धार की ‘भोजशाला’ को लेकर पिछले 21 सालों से चला आ रहा कानूनी गतिरोध अब पूरी तरह खत्म हो गया है. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने एक नया और बड़ा प्रशासनिक आदेश जारी कर दिया है. इस आदेश के बाद भोजशाला के सरकारी और आधिकारिक टाइटल से ‘कमाल मौलाना मस्जिद’ का नाम पूरी तरह हटा दिया गया है. अब इस पूरे परिसर को आधिकारिक तौर पर ‘राजा भोज द्वारा स्थापित भोजशाला और संस्कृत पाठशाला’ के रूप में मान्यता दे दी गई है.
इस नए आदेश के बाद केवल नाम ही नहीं बदला है, बल्कि परिसर के भीतर धार्मिक गतिविधियों के नियम भी पूरी तरह बदल गए हैं. आइए जानते हैं कि एएसआई के इस नए आदेश में हिंदुओं की पूजा-अर्चना को लेकर क्या गाइडलाइंस तय की गई हैं.
ASI ने अपने नए नोटिफिकेशन में 7 अप्रैल 2003 के उस पुराने और विवादित आदेश को पूरी तरह से निरस्त (Cancel) कर दिया है, जिसके तहत दोनों समुदायों के लिए दिन और अधिकार तय किए गए थे. 2003 के पुराने आदेश के मुताबिक, हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार को पूजा और पर्यटकों को शुक्रवार को छोड़कर अन्य दिनों में सशुल्क प्रवेश की अनुमति थी, जबकि शुक्रवार को मुस्लिम समुदाय को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था. अब यह व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो चुकी है.
हिंदू समुदाय को अब भोजशाला परिसर में पूजा-आराधना और अध्ययन संबंधी गतिविधियों के लिए बिना किसी रोक-टोक के प्रवेश का अधिकार सौंप दिया गया है. अब हिंदू श्रद्धालु साल के सभी 365 दिन मां सरस्वती (वाग्देवी) की पूजा-अर्चना कर सकेंगे. उनके अधिकार को अब किसी तय दिन की सीमा में नहीं बांधा जाएगा.
ये भी पढ़ें: अगला हफ्ता ईरान पर पड़ेगा सबसे भारी! क्या है पेंटागन का ‘महाविनाश’ ब्लूप्रिंट? डोनाल्ड ट्रंप की हरी झंडी का इंतजार
एएसआई ने हाई कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए स्पष्ट किया है कि यह स्थल मूल रूप से राजा भोज द्वारा स्थापित संस्कृत शिक्षा और शोध का ऐतिहासिक केंद्र रहा है, जो देवी वाग्देवी को समर्पित मंदिर है. भोजशाला पहले की तरह ही एएसआई के अधीन एक ‘संरक्षित स्मारक’ (Protected Monument) बना रहेगा. हालांकि, परिसर के भीतर सुरक्षा और एंट्री के समय को लेकर स्थानीय प्रशासन (Local Administration) गाइडलाइंस तय करेगा.
इस नए प्रशासनिक आदेश के लागू होते ही धार और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता कर दी गई है. वहीं दूसरी ओर, वर्षों पुराना प्रतिबंध हटने की खुशी में श्रद्धालुओं के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है. मां सरस्वती के इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन और पूजा करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है.
पारंपरिक फसलों से हटकर किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए बिहार सरकार ने बांस ('ग्रीन…
Chicago Hindu Temple Attack Plot: अमेरिका के इलिनोइस में एक 19 वर्षीय युवक को हिंदू…
Genetic Engineering Course: साइंस के स्टूडेंट्स के लिए बड़ी खुशखबरी है. IISc बैंगलोर ने 'एडवांसेस…
Pm modi: नवरात्रि के पांचवें दिन पीएम नरेंद्र मोदी ने मां स्कंदमाता को नमन करते…
Maharashtra Earthquake: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में 15 अक्टूबर 2026 की सुबह 2.9 तीव्रता का…
बिग बॉस 20 से बाहर आते ही सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर नकुल ढुल (मीठू डॉन) ने…