Pentagon Plan For US Iran War: पश्चिम एशिया में अगले हफ्ते एक बड़े महायुद्ध का सायरन बज सकता है. अमेरिका की मांगों को दरकिनार करना ईरान को अब बहुत भारी पड़ने वाला है. ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, पेंटागन ने ईरान पर एक भयानक सैन्य हमले के कई विकल्प तैयार कर लिए हैं और अब बस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘फाइनल ऑर्डर’ का इंतजार है. पीस डील (शांति समझौता) की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं और अस्थाई सीजफायर वेंटिलेटर पर है.
जमीन से समुद्र तक अमेरिकी सेना का ‘चक्रव्यूह’ (US Iran war Update)
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट कर दिया है कि जरूरत पड़ने पर सैन्य कार्रवाई की पूरी योजना तैयार है. इस बार अमेरिका केवल हवाई हमलों तक सीमित नहीं रहने वाला है. अमेरिका ने पश्चिम एशिया में जमीनी मार्ग से ईरान को शिकस्त देने के लिए 50,000 सैनिक उतारने का मन बना लिया है. दो एयरक्राफ्ट कैरियर, एक दर्जन से ज्यादा नेवी डेस्ट्रॉयर और बड़ी तादाद में लड़ाकू विमान क्षेत्र में मोर्चा संभाल चुके हैं. अरब सागर में ‘USS त्रिपोली’ पर युद्धाभ्यास तेज हो गया है.
सबसे चौंकाने वाला प्लान यह है कि अमेरिकी स्पेशल ऑपरेशन फोर्सेज (Special Ops) जमीन पर उतरकर ईरान के ‘इस्फहान’ परमाणु साइट में दबे एनरिच्ड यूरेनियम तक पहुंचने की तैयारी में हैं. हालांकि, अधिकारियों का मानना है कि यह ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा होगा.
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‘दोस्त’ चीन ने दिया ईरान को सबसे बड़ा झटका
इस पूरे तनाव में ट्रंप का मनोबल बढ़ाने वाली सबसे बड़ी खबर बीजिंग से आई है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप के बीच इस बात पर सहमति बन गई है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत किसी भी हाल में नहीं दी जा सकती.
चीन ने साफ किया है कि वह ग्लोबल ऑयल ट्रेड के लिए अहम ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को खुला रखने के पक्ष में है और वहां किसी भी सैन्य तैनाती या टोल वसूली का विरोध करता है. ट्रंप ने दावा किया है कि चीन ने ईरान को कोई भी सैन्य उपकरण न देने का भरोसा दिया है. चीन के इस रुख को ईरान के लिए एक बहुत बड़े कूटनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है.
होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी, 72 जहाजों को लौटाया (US Iran war Latest Update)
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट में ईरान की कड़ी नाकेबंदी कर दी है, जिससे ईरान का तेल निर्यात लगभग ठप हो गया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, ब्लॉकेड शुरू होने के बाद से अब तक ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले 72 कमर्शियल जहाजों को वापस लौटा दिया गया है या उनका रास्ता बदल दिया गया है, जबकि 4 जहाजों को डिसेबल (Disabled) कर दिया गया है.
ईरान की ‘एटमी’ धमकी और पलटवार
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने शर्त रखी है कि अगर वह 20 साल के लिए अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम रोक दे, तभी नया समझौता होगा. इसके जवाब में ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं. ईरानी संसद के प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई ने खुली धमकी दी है कि यदि हमला हुआ, तो ईरान अपने यूरेनियम एनरिचमेंट को सीधे 90 फीसदी (हथियार बनाने के स्तर) तक ले जाकर एटम बम बना लेगा.
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वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका पर अब भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि 28 फरवरी को बातचीत के बीच ही अमेरिका ने हमला कर दिया था. अराघची ने चेतावनी दी है कि ईरान सम्मान की भाषा समझता है और इस संकट का कोई सैन्य समाधान नहीं हो सकता. दुनिया अब सांसें थामे इस बात का इंतजार कर रही है कि ट्रंप की अगली चाल क्या होगी.
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