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Bihar Assembly Election 2025: बिहार से बाहर 3 करोड़ प्रवासी, लेकिन चुनावों में नहीं होती चर्चा…क्या उनका दर्द कोई मुद्दा बनेगा?

Bihar Assembly Election 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है. बिहार में नेताओं का जमघट लगना शुरू हो गया है. देश भर के बड़े-बड़े नेता रैलियों में बेरोजगारी, जातीय समीकरणों और विकास के वादे कर रहे हैं. लेकिन देशभर के कंस्ट्रक्शन साइट्स, फैक्ट्रियों और होटलों में खट रहे बिहारी उनको याद ही नहीं हैं.

बिहार से बाहर रोजी-रोटी कमाने गए करोड़ों मजदूर, हर चुनाव में उस वोटर की तरह हैं, जो ना तो वोट डाल पाते हैं और न ही उनके मुद्दे इन चुनावी भाषणों में जगह बना पाते हैं.

बिहार से बाहर कितने प्रवासी मजदूर?

बिहार की वर्तमान में कुल आबादी 13 करोड़ के करीब है. जिसमें लगभग 10 करोड़ लोग व्यस्क हैं. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि इन 10 करोड़ लोगों में से 3 करोड़ लोग बिहार के हैं. ये दूसरे राज्यों में मजदूरी करने वाले लोग हैं. पूरे भारत में प्रवासी मजदूर पैदा करने में बिहार दूसरे नंबर पर आता है. पहले नंबर पर अभी भी उत्तर प्रदेश है.

देश में सबसे कम है प्रति व्यक्ति आय

प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश में सबसे पिछड़ा है. इसका सबसे बड़ा कारण बिहार में रोजगार के मौके का कम होना, सरकार के द्वारा इसको लेकर कोई ठोस नीति नहीं है. डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमी अफेयर्स की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023-24 में बिहार में प्रति व्यक्ति औसत आय सालाना ₹32,227 थी.

यानी हर महीने सिर्फ 2686 रुपये की कमाई. वहीं अगर हम उत्तर प्रदेश की बात करें तो यह 50,341 रुपये था. जो की बिहार से डेढ़ गुना से भी ज्यादा है. इस लिस्ट में सिक्किम जैसा छोटे राज्य की प्रति व्यक्ति आय 2.92 लाख रुपये थी.

देश भर में कहीं भी हादसा हो मरते बिहारी ही हैं (Bihar Assembly Election 2025)

देश भर में कहीं भी कोई हादसा हो वहां पर मरने वालों में बिहार के लोग जरूर होते हैं. चाहे वो हैदराबाद का हादसा हो या सूरत में बिल्डिंग गिरने की घटना हो या मुंबई में फैक्ट्री में आग लगने की घटना हो. इन सभी त्रासदियों में बिहार के ही मजदूर सबसे ज्यादा जान गंवाते हैं.

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Bihar Assembly Election 2025: बिहार के प्रवासियों की है ये मांगें

बिहार में चुनाव हो रहा है. लेकिन उसी बिहार के करीब 3 करोड़ वोटर बिहार से बाहर हैं. जिनका कोई सुध लेने वाला नहीं है. इसी तरह की एक वोटर आकांक्षा हैं. जो दिल्ली में रहकर जॉब करती हैं. वो बताती हैं कि, चाहे सरकार किसी की भी हो, सभी सिर्फ अपना फायदा देखते हैं. कोई प्रवासियों की सुध लेने वाला नहीं है.

आकांक्षा कहती हैं कि बिहार से बाहर कमाने गए लोगों के लिए भी वोट डालने की व्यवस्था होनी चाहिये. आखिर वो भी बिहार के ही वोटर हैं.

सरकारों के पास नहीं है विकास का विजन

वहीं बिहार के पश्चिमी चंपारण के रहने वाले पंकज बताते हैं कि, बिहार के नेताओं के पास बिहार के विकास को लेकर कोई विजन नहीं है. इसलिए लोग पलायन करने को मजबूर हैं. बिहार में शिक्षा व्यवस्था दुरुस्त होनी चाहिये और सरकार को रोजगार के मौके क्रियेट करना चाहिये. जिससे बिहार से लोगों का पलायन रुके.

– भारत एक्सप्रेस

Govind Kumar Singh

गोविंद सिंह बिहार के कैमूर जिले से ताल्लुक रखते हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा वाराणसी के उदय प्रताप कॉलेज से हासिल की और पटना कॉलेज, पटना से मास कम्युनिकेशन में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखा और ईटीवी भारत, इनशॉर्ट्स और श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन जैसे संस्थानों में काम करते हुए समाचार लेखन, कंटेंट एडिटिंग, रिसर्च और न्यूज प्रोडक्शन का अनुभव हासिल किया। फिलहाल वह भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। उनकी पत्रकारिता का प्रमुख फोकस विदेश नीति, राष्ट्रीय राजनीति और बिहार से जुड़े मुद्दों पर है।

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