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Bihar New CM Oath Ceremony: बिहार की सियासत का ऊंट किस करवट बैठेगा, इसका फैसला बस कुछ ही घंटों में होने वाला है. राजधानी पटना की सड़कों खामोशी के बीच सियासी तूफान राज्य के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने की तैयारी कर रहा है. मुख्यमंत्री आवास से लेकर राजभवन तक हलचल तेज है. बैरिकेडिंग लग रही है, सुरक्षा की रूपरेखा तय हो रही है. ऐसा इसलिए, क्योंकि 14 अप्रैल की सुबह 11 बजे नीतीश कैबिनेट की जो बैठक होने वाली है, वह महज एक रूटीन मीटिंग नहीं, बल्कि एक युग का अंत और नए युग की शुरुआत का बिगुल हो सकती है.
सुशासन बाबू (नीतीश कुमार) की विदाई के बीच, बिहार में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) का मुख्यमंत्री गद्दी पर बैठने की तैयारी कर रहा है. लेकिन सबसे बड़ा सस्पेंस यह है कि आखिर वो चेहरा कौन होगा? और इस सस्पेंस से पर्दा उठाने की जिम्मेदारी पार्टी के ‘संकटमोचक’ और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम यानी ‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान को सौंपी गई है.
बिहार में नई सरकार के गठन को लेकर भाजपा कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पार्टी ने पश्चिम बंगाल के चुनावी रण में पसीना बहा रहे अपने लगभग 50 विधायकों को ‘हाई अलर्ट’ कर दिया है. पार्टी आलाकमान का सख्त फरमान है कि सभी विधायक 14 अप्रैल की सुबह तक हर हाल में पटना पहुंच जाएं. विधायक दल की बैठक में इन सबकी मौजूदगी अनिवार्य कर दी गई है. हालांकि, अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को बंगाल में ही डटे रहने का निर्देश दिया गया है.
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव अरुण सिंह द्वारा जारी पत्र के अनुसार, पार्टी के संसदीय बोर्ड ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान को बिहार का केंद्रीय पर्यवेक्षक नियुक्त किया है. शिवराज 14 अप्रैल को पटना पहुंचेंगे और उनकी निगरानी में ही विधायक दल का नया नेता (मुख्यमंत्री) चुना जाएगा.
रायसेन में एक कार्यक्रम के दौरान जब शिवराज से इस नई जिम्मेदारी के बारे में पूछा गया, तो उनका जवाब था कि पार्टी जो काम दे, सब मंजूर.” डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने भी ‘एक्स’ पर पोस्ट कर शिवराज सिंह चौहान का स्वागत किया है.
जैसे-जैसे घड़ी की सुइयां 14 अप्रैल के करीब पहुंच रही हैं, मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर सस्पेंस गहराता जा रहा है. राजनीतिक गलियारों में फिलहाल चार नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं.
नीतीश कुमार के इस्तीफे की संभावनाओं के बीच, जनता दल यूनाइटेड (JDU) भी अपने पत्ते सहेजने में लगा है. रविवार को जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा, मंत्री विजय चौधरी और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह ने सीएम नीतीश से मुलाकात की. अगर भाजपा का मुख्यमंत्री बनता है, तो जेडीयू की ओर से निशांत कुमार (नीतीश कुमार के पुत्र) या अन्य वरिष्ठ नेताओं में से किसी को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है. जेडीयू कोटे से विजेंद्र यादव, विजय कुमार चौधरी, अशोक चौधरी और लेसी सिंह जैसे चेहरे मंत्री पद की रेस में हैं.
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मंत्री जमा खान का कहना है कि कल (14 अप्रैल) कैबिनेट मीटिंग है, और परसों (15 अप्रैल) शपथ ग्रहण होना चाहिए. पटना डीएम त्यागराजन एसएम का राजभवन जाकर सुरक्षा का जायजा लेना और बापू सभागार को खाली कराया जाना इस बात की तस्दीक करता है कि शपथ ग्रहण समारोह की पटकथा पूरी तरह से लिखी जा चुकी है.
नीतीश कुमार का राजभवन जाकर इस्तीफा सौंपना अब सिर्फ औपचारिकता मात्र लग रहा है. 15 अप्रैल को जब राजभवन या लोक भवन के मंच से शपथ के बोल गूंजेंगे, तो उसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी इस घटना को ऐतिहासिक बना देगी. अब बिहार और देश की निगाहें सिर्फ एक ही सवाल पर टिकी हैं ‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान आखिर किस नाम की पर्ची खोलेंगे? क्या बिहार की राजनीति का यह नया ‘बॉस’ सुशासन के उस मॉडल को आगे बढ़ा पाएगा? काउंटडाउन शुरू हो चुका है, और ‘खेला’ अभी बाकी है.
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