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‘समृद्धि यात्रा’ या ‘दुर्गति यात्रा’? नीतीश कुमार पर कांग्रेस का सीधा प्रहार, कहा- ‘वेंटिलेटर पर है बिहार!’

बिहार की राजनीति में इन दिनों मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ विवादों के घेरे में आ गई है. शाहाबाद के बक्सर और भोजपुर इलाकों में इस यात्रा को लेकर सियासी पारा चढ़ गया है. विपक्षी दल कांग्रेस ने इस पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे जनता के साथ छलावा करार दिया है.

कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जिसे सरकार ‘समृद्धि यात्रा’ का नाम दे रही है, वह असल में बिहार की ‘दुर्गति यात्रा’ है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जब राज्य का युवा सड़कों पर है और स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर, तो फिर ये समृद्धि कैसी?

कांग्रेस का आरोप है कि एनडीए सरकार पिछले कई सालों से राज्य को बेरोजगारी और भ्रष्टाचार की खाई में धकेल रही है और अब चुनाव पास देख विकास का झूठा दावा किया जा रहा हैं.

कागजों पर विकास, जमीन पर बदहाली

कांग्रेस प्रवक्ता ने मुख्यमंत्री की घेराबंदी करते हुए कहा कि सरकारी दफ्तरों में बिना ‘कमीशन’ के कोई काम नहीं हो रहा. भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि सरकारी योजनाओं का पैसा जनता तक पहुंचने के बजाय बीच में ही बंदरबांट हो जा रहा है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा,

“मुख्यमंत्री को उनके अधिकारी विकास का एक ऐसा भ्रम दिखा रहे हैं, जिसका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है. जनता महंगाई और प्रशासनिक सुस्ती से त्रस्त है, लेकिन सरकार को सिर्फ अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की चिंता है.”

राजनीति या अस्तित्व बचाने की जंग?

सियासी गलियारों में यह चर्चा है कि नीतीश कुमार की यह यात्रा अपनी पुरानी साख वापस पाने की एक कोशिश है. स्नेहाशीष वर्धन ने भी यही बात दोहराई कि यह यात्रा बिहार के विकास के लिए नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के अपने गिरते राजनीतिक अस्तित्व को बचाने के लिए है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के साथ मिलकर राज्य में सांप्रदायिक राजनीति को हवा दी जा रही है, जिससे बिहार का आपसी भाईचारा और सामाजिक ताना-बना बिगड़ रहा है.

फोटो खिंचवाने से नहीं, काम से बदलेगा बिहार- कांग्रेस

कांग्रेस ने कहा कि बिहार की जनता अब प्रतीकात्मक राजनीति और इन रस्म अदायगी वाली यात्राओं से ऊब चुकी है. डॉ. वर्धन ने मांग की कि मुख्यमंत्री को हकीकत स्वीकार करनी चाहिए और जनता के प्रति जवाबदेह बनना चाहिए. पार्टी का कहना है कि अगर सरकार वाकई गंभीर है, तो उसे यात्रा निकालने के बजाय बेरोजगारी दूर करने और गिरती कानून व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस नीतिगत कदम उठाना चाहिए.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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