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TMC का M+M फॉर्मूला! ओवैसी-हुमायूं गठबंधन से ‘ममता दीदी’ की मुश्किलें बढ़ीं, मुस्लिम वोट बैंक पर कितना असर पड़ेगा? पढ़ें- EXPLAINER

Owaisi Humayun alliance muslim vote: पश्चिम बंगाल में ओवैसी और हुमायूं कबीर के गठबंधन से TMC के M+M फॉर्मूले को चुनौती मिल सकती है. जानिए मुस्लिम वोट बैंक पर इसका क्या असर पड़ेगा.

Mamata Banerjee

Muslim vote bank West Bengal

Owaisi Humayun alliance muslim vote: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव (West Bengal Election 2026) के लिए एक महीने से भी कम समय बचा हुआ है, जिसके लिए राजनीतिक पार्टियां सियासी गठजोड़ में लगी हुई हैं. बुधवार (25 मार्च) को हुए एक गठबंधन ने बंगाला राजनीति को पूरी तरह बदल दिया है. असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी AIMIM ने हुमायूं कबीर (Humayun Kabir) की आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के साथ चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. जिसके बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि TMC और कांग्रेस के मुस्लिम वोट बैंक पर यह गठबंधन कड़ा प्रहार कर सकता है.

TMC का एम+एम फॉर्मूला (Muslim voter in West Bengal)

बंगाल चुनाव में सत्ताधारी पार्टी TMC हमेशा से एम+एम (M+M) के फॉर्मूला पर चुनाव लड़ती आई है. इसमें एक एम का मतलब ‘मुस्लिम वोटर’ है, जिसके लिए ऐसा कहा जाता है कि उसका वोट TMC के लिए सेफ है. और दूसरे एम का मतलब हैं ‘महिला’, जिसके वोट के लिए TMC को महनत करनी पड़ती है.

बता दें कि बंगाल के 5 जिलों में मुस्लिम आबादी खासतौर पर ज्यादा है. इनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर, बीरभूम और दक्षिण 24 परगना शामिल हैं. जानकारी के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में 66 फीसदी, मालदा में 51 प्रतिशत, उत्तरी दिनाजपुर में 49 फीसदी, बीरभूम में 37 प्रतिशत और दक्षिण 24 परगना में 35 फीसदी के करीब मुस्लिम आबादी रहती है.

Mamata Banerjee with Muslim voters

85 सीटों पर मुस्लिम वोटर का प्रभाव ( Muslim vote bank West Bengal)

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए राज्य की 294 सीटों में से 85 सीटों पर मुस्लिम वोटर का प्रभाव साफ तौर पर नजर आता है. 2021 विधानसभा चुनाव में TMC ने इन 85 सीटों में से 75 सीटों पर जीत दर्ज की थी. जिसमें दक्षिण 24 परगना की 31 में से 30, मुर्शिदाबाद की 22 में से 20, मालदा की 12 में से 8, उत्तर दिनाजपुर की 9 में से 7, बीरभूम की 11 में से 10 सीट शामिल हैं.

Mamata Banerjee with Muslim

2011-2016 और 2021 के चुनाव के समीकरण

हालांकि अब तक के चुनाव नतीजों की बात करें तो 2011 और 2016 के विधानसभा चुनाव में मुस्लिम मतदाताओं का वोट कांग्रेस और टीएमसी के बीच बंटा था, लेकिन जीत हमेशा ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की हुई. साल 2021 के चुनाव में भी बीजेपी पूरी तरह से तैयार नजर आ रही थी. हालांकि TMC ने चुनाव में कभी ‘मां-माटी और मानुष’ का नारा दिया तो कभी बंगाल अस्मिता की बहस छेड़ी. साथ ही ‘जय श्री राम’ के नारे के जवाब में ‘जय काली कलकत्ते वाली’ का उद्घोष करते हुए ममता बनर्जी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में व्हीलचेयर पर बैठकर भी जोरदार प्रचार किया और बीजेपी को महज 77 सीटों तक ही सीमित रखने में सफलता हासिल की.

Mamata Banerjee On wheelChair Campaign

ओवैसी के नए गठबंधन से होगा भारी नुकसान

हाल ही में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर के बीच बने गठबंधन को लेकर पश्चिम बंगाल की सियासत में नई हलचल देखने को मिल रही है. इस गठजोड़ को TMC के मुस्लिम वोट बैंक के लिए संभावित चुनौती के रूप में देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि हुमायूं कबीर ने मुस्लिम मतदाताओं के एक वर्ग के बीच अपनी मजबूत पकड़ बनाई है, जहां उनके समर्थक उन्हें समुदाय की आवाज के रूप में पेश कर रहे हैं. वहीं असदुद्दीन ओवैसी पहले से ही मुस्लिम राजनीति में एक प्रभावशाली चेहरा माने जाते हैं, जिससे इस गठबंधन की अहमियत और बढ़ गई है.


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हुमायूं कबीर ने आगामी विधानसभा चुनाव में 182 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है और अब तक 15 सीटों के लिए प्रत्याशियों के नामों का ऐलान भी कर चुके हैं. वे मुर्शिदाबाद जिले की दो सीटों रेजीनगर और नौवाला से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, जहां मुस्लिम मतदाताओं की संख्या काफी अधिक है.

इन परिस्थितियों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बंगाल में बना यह नया गठबंधन ‘ममता दीदी’ के एम+एम (M+M) रणनीति को चुनौती दे सकता है और चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है.

-भारत एक्सप्रेस



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