Cops reel ban Bihar: ऐसा लगता है कि बिहार पुलिस मुख्यालय ने अपराधियों को पकड़ने से ज्यादा अब अपने पुलिसकर्मियों के “गेटअप” और उनके “इंस्टाग्राम करियर” पर लगाम कसने का मन बना लिया है. हाल ही में मशहूर चश्मा कंपनी ‘लेंसकार्ट’ में ‘बिंदी और तिलक’ पर बैन को लेकर जो देशव्यापी बवाल कटा, लगता है बिहार पुलिस के आला अधिकारियों ने उससे कोई सबक नहीं लिया; बल्कि शायद उनका ही ‘ड्रेस कोड मैनुअल’ कॉपी-पेस्ट कर लिया है.
बिहार के पुलिसकर्मी आजकल थानों में कम और सोशल मीडिया की रील्स पर ज्यादा ‘ड्यूटी’ दे रहे थे. ‘सिंघम’ और ‘दबंग’ के बैकग्राउंड म्यूजिक पर वर्दी में भौकाल टाइट करने वाले 40 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को पुलिस मुख्यालय ने सस्पेंड कर दिया है.
नया फरमान साफ है: वर्दी में न कोई रील बनेगी, न कोई सेल्फी पोस्ट होगी. मजे की बात तो यह है कि हमेशा मुख्यालय के फैसलों पर मोर्चा खोलने वाला ‘बिहार पुलिस एसोसिएशन’ (Bihar Police Association) भी इस बार सस्पेंडेड ‘रील-स्टार्स’ के समर्थन में नहीं उतरा है, बल्कि खुद अपील कर रहा है कि वर्दी की गरिमा बचाएं और मोबाइल अंदर रखें.
रील और सेल्फी तक तो बात समझ में आती है, लेकिन विवाद की असली जड़ है नया “ग्रूमिंग और ब्यूटी कोड”. मुख्यालय के अनुसार, अब पुरुष पुलिसकर्मी ड्यूटी पर माथे पर टीका (चंदन/तिलक) लगाकर नहीं आ सकते और न ही दसों उंगलियों में अंगूठियां पहन सकते हैं. वहीं, महिला पुलिसकर्मियों के लिए जरूरत से ज्यादा गहने और भारी मेकअप (श्रृंगार) करके ड्यूटी पर आने की सख्त मनाही है.
इस फरमान को देखकर बरबस ही ‘लेंसकार्ट विवाद’ की याद आ जाती है. अभी हफ्ते भर पहले ही लेंसकार्ट ने भी अपनी एक पुरानी गाइडलाइन के तहत कर्मचारियों के तिलक, बिंदी और कलावा पहनने पर कथित रोक लगाई थी, जिसके बाद पूरे देश में कंपनी के खिलाफ ऐसा बवाल कटा कि सीईओ पीयूष बंसल को खुद सामने आकर माफी मांगनी पड़ी और पॉलिसी बदलनी पड़ी.
लेंसकार्ट मामले की तरह ही, बिहार पुलिस के इस आदेश पर भी हिंदू संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है. हिंदू शिव भवानी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष लव कुमार सिंह ‘रुद्र’ ने पुलिस मुख्यालय के इस फैसले पर तीखे सवाल उठाए हैं. लव कुमार सिंह का कहना है कि चंदन और तिलक सनातन धर्म की आस्था और हिंदू संस्कृति की पहचान है. वर्दी के नाम पर इस तरह की रोक सीधा धार्मिक भावनाओं को आहत करती है.
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उनका साफ तौर पर मानना है कि प्रदेश की जनता को उम्मीद थी कि वर्तमान सरकार में सनातन परंपराओं का सम्मान होगा, लेकिन ऐसे उल्टे फैसले समाज में अनावश्यक असंतोष पैदा कर रहे हैं. संगठन ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर पुलिस प्रशासन ने इस “लेंसकार्ट-प्रेरित” निर्णय पर पुनर्विचार कर न्यायपूर्ण नीति नहीं अपनाई, तो वे अपनी आस्था के लिए लोकतांत्रिक तरीके से सड़क पर उतरेंगे.
बिहार पुलिस का रील और सेल्फी पर लगाम कसना एक सराहनीय कदम है, क्योंकि पुलिस का काम जनता की सुरक्षा करना है, न कि सोशल मीडिया पर ‘लाइक्स’ बटोरना. लेकिन, जिस तरह से ड्यूटी के दौरान तिलक और धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया गया है, उसने बिना मांगे एक नए विवाद को निमंत्रण दे दिया है. कॉर्पोरेट दुनिया में तो ‘लेंसकार्ट’ को ग्राहकों के गुस्से के आगे झुकना पड़ा था, अब देखना दिलचस्प होगा कि बिहार पुलिस का मुख्यालय धार्मिक भावनाओं के सामने अपने इस विवादित ‘ड्रेस कोड’ पर कायम रहता है या फिर कोई यू-टर्न लेता है.
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