BJP Organizational Changes Nitin Nabin Strategy: भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने संगठन के स्तर पर एक ऐसा बड़ा और रणनीतिक फेरबदल किया है, जिसने देश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. बीजेपी के राष्ट्रीय चुनाव प्रभारी नितिन नबीन ने कमान संभालते ही संगठन को धार देना शुरू कर दिया है. इसी कड़ी में गुरुवार को बीजेपी आलाकमान ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली सहित चार महत्वपूर्ण राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों को बदलने का बड़ा एलान किया.
इस महा-बदलाव (New BJP State Presidents List) के तहत दिल्ली, पंजाब, हरियाणा और त्रिपुरा की कमान अब पूरी तरह नए चेहरों के हाथों में है. राजनीति के पंडित इसे महज सांगठनिक बदलाव नहीं, बल्कि आगामी चुनावों और क्षेत्रीय-जातीय समीकरणों को साधने के लिए ‘नितिन नबीन की चौकड़ी’ का मास्टरस्ट्रोक मान रहे हैं. आइए समझते हैं कि इन 4 नए सिपाहियों की नियुक्ति के पीछे बीजेपी की असली रणनीति क्या है?
बीजेपी ने दिल्ली के निवर्तमान अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा की जगह पूर्वी दिल्ली से सांसद और मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री हर्ष मल्होत्रा को नया कप्तान बनाया है. हर्ष मल्होत्रा सिर्फ सांसद या मंत्री नहीं हैं, बल्कि वे पूर्वी दिल्ली नगर निगम (EDMC) के मेयर और पार्षद भी रह चुके हैं. दिल्ली की जमीनी एमसीडी (MCD) राजनीति का उन्हें गहरा अनुभव है. आम आदमी पार्टी (AAP) को दिल्ली के स्थानीय मुद्दों पर घेरने और आगामी निगम व विधानसभा चुनावों में कार्यकर्ताओं में आक्रामकता भरने के लिए बीजेपी ने इस जमीनी सिपाही पर सबसे बड़ा दांव खेला है.
पंजाब में सुनील जाखड़ का तीन साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद 75 वर्षीय पूर्व विधायक केवल सिंह ढिल्लों को राज्य की कमान सौंपी गई है. पंजाब में एक साल से भी कम समय में विधानसभा चुनाव होने हैं. ढिल्लों दो बार बरनाला से विधायक रह चुके हैं और पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के बेहद करीबी माने जाते हैं. मालवा क्षेत्र में मजबूत पकड़ रखने वाले एक बड़े सिख उद्योगपति चेहरा होने के कारण बीजेपी ने उन पर दांव लगाया है. रणनीति साफ है कि शिरोमणि अकाली दल, कांग्रेस और ‘आप’ के बीच हो रहे चतुष्कोणीय मुकाबले में सिख वोट बैंक को अपने पाले में खींचना.
हरियाणा में मोहन लाल बडौली को हटाकर डॉ. अर्चना गुप्ता को नया प्रदेश अध्यक्ष बनाकर बीजेपी ने सबको चौंका दिया है. डॉ. अर्चना गुप्ता इससे पहले पानीपत की जिला अध्यक्ष रह चुकी हैं. हरियाणा की सियासत हमेशा से जटिल जातीय समीकरणों (जाट बनाम गैर-जाट) के इर्द-गिर्द घूमती है. एक महिला डॉक्टर और सांगठनिक नेता को आगे करके बीजेपी ने आधी आबादी को साधने के साथ-साथ एक न्यूट्रल और सर्वमान्य चेहरा देने की कोशिश की है, ताकि पार्टी के भीतर किसी तरह की गुटबाजी न पनप सके.
पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में राजीव भट्टाचार्जी की जगह 40 वर्षीय युवा विधायक अभिषेक देबरॉय को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. रणनीति: गोमती जिले के माताबाड़ी से विधायक अभिषेक देबरॉय युवा हैं और फार्मेसी में ग्रेजुएट हैं. 2023 के चुनाव में कांग्रेस को बड़े अंतर से हराने वाले इस चेहरे को आगे लाने के पीछे नितिन नबीन की रणनीति बहुत साफ है कि पूर्वोत्तर में पार्टी के भीतर एक नई और युवा लीडरशिप तैयार करना, जो युवा वोटर्स को सीधे कनेक्ट कर सके.
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इन नियुक्तियों से साफ है कि बीजेपी का केंद्रीय नेतृत्व अब राज्यों में ऐसे नेताओं को आगे ला रहा है जो केवल बड़े नाम न हों, बल्कि जिनके पास सांगठनिक काम और जमीनी चुनाव लड़ने का वास्तविक अनुभव हो. आगामी राज्यों के चुनावों से पहले नितिन नबीन के इन 4 सिपाहियों की परीक्षा बेहद कठिन होने वाली है.
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