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विपक्ष की ‘नो’, BJP का ‘शो’: महिला आरक्षण पर छिड़ा सियासी घमासान, क्या 2029 के चुनाव का टर्निंग पॉइंट बनेगा ये मुद्दा?

BJP Nationwide Protest: संसद के विशेष सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (131वां संविधान संशोधन विधेयक) के गिरने के बाद देश की सियासत पूरी तरह गर्मा गई है. लोकसभा में आवश्यक दो-तिहाई बहुमत न मिल पाने के कारण इस ऐतिहासिक बिल की विफलता को भाजपा ने ‘नारी शक्ति का अपमान’ करार दिया है. इसके विरोध में आज भारतीय जनता पार्टी और एनडीए (NDA) ने पूरे देश में व्यापक विरोध प्रदर्शन का बिगुल फूंक दिया है.

लोकसभा में क्या हुआ?

131वां संविधान संशोधन विधेयक, जिसका उद्देश्य संसद में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना और सदन की सदस्य संख्या बढ़ाना था, लोकसभा में गिर गया. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 वोट दर्ज किए गए. संवैधानिक नियमों के अनुसार, इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता थी, जिससे यह विधेयक चूक गया.

संसद से सड़क तक की लड़ाई

विधेयक गिरने के तुरंत बाद भाजपा की महिला सांसदों ने संसद परिसर में मकर द्वार पर विरोध प्रदर्शन किया. अब भाजपा इस लड़ाई को जनता के बीच ले जा रही है.

भाजपा महिला मोर्चा के नेतृत्व में आज देश के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किए जा रहे हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं का लक्ष्य घर-घर जाकर यह बताना है कि विपक्ष ने किस तरह महिलाओं के संवैधानिक हक का रास्ता रोका है.

वहीं, उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा है. यहां भाजपा ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके झंडे जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया.

अमित शाह का विपक्ष पर तीखा प्रहार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस विफलता के लिए ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि विपक्ष ने केवल अपने राजनीतिक स्वार्थ और ‘परिसीमन’ का झूठा डर दिखाकर इस ऐतिहासिक अवसर को खत्म कर दिया. शाह ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल कभी नहीं चाहते थे कि 850 सीटों वाली नई लोकसभा में महिलाओं को उनका उचित प्रतिनिधित्व मिले.

विपक्ष का पलटवार: ‘सरकार की नीयत में खोट’

दूसरी ओर, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भाजपा के इन प्रदर्शनों को अपनी विफलता छिपाने का नाटक बताया है. विपक्ष का तर्क है कि सरकार ने जानबूझकर परिसीमन जैसे विवादित प्रावधानों को बिल में जोड़ा ताकि इसे गिराने का आधार तैयार किया जा सके. विपक्षी नेताओं का कहना है कि वे आरक्षण के समर्थक हैं, लेकिन सरकार की ‘चुनावी चालबाजी’ के खिलाफ हैं.

आगामी चुनावों पर असर

महिला आरक्षण बिल का गिरना अब 2026 के आगामी विधानसभा चुनावों (विशेषकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु) और 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए एक बड़ा एजेंडा बन गया है. भाजपा इसे ‘नारी शक्ति बनाम विपक्ष’ की लड़ाई के रूप में पेश कर रही है, जिससे आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक ध्रुवीकरण देखने को मिल सकता है.

ये भी पढ़ें: राहुल गांधी की कथित दोहरी नागरिकता मामले में हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, एफआईआर दर्ज करने का निर्देश

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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