फरवरी का महीना करीब है और देशभर की नजरें एक बार फिर दिल्ली के गलियारों पर टिकी हैं. इस बार का बजट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं, बल्कि एक बड़ा रिकॉर्ड भी अपने साथ ला रहा है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को अपना 9वां बजट पेश करेंगी. इसके साथ ही वह देश के इतिहास में सबसे ज्यादा बार बजट पेश करने वाली पहली वित्त मंत्री बन जाएंगी.
आजाद भारत का यह 80वां बजट होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस बजट को आज हम डिजिटल रूप में देखते हैं, वह कभी शाम के अंधेरे में पेश होता था और चमड़े के भारी ब्रीफकेस में बंद होकर आता था? आइए जानते हैं बजट के उस सफर को, जिसने भारत की तकदीर बदली.
इस बार सोशल मीडिया पर एक चर्चा गर्म है कि 1 फरवरी को रविवार है, तो क्या उस दिन छुट्टी होगी? दरअसल, संसदीय इतिहास गवाह है कि बजट के लिए कोई छुट्टी नहीं होती. इससे पहले भी 2020 में रविवार को बजट पेश हो चुका है. पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली और खुद निर्मला सीतारमण ने भी शनिवार के दिन बजट पेश कर परंपरा निभाई है. संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने संकेत दिए हैं कि इस पर अंतिम फैसला जल्द होगा, लेकिन पूरी उम्मीद है कि रविवार होने के बावजूद संसद में कामकाज होगा.
एक दौर था जब बजट शाम को 5 बजे पेश किया जाता था. यह अंग्रेजों के जमाने की रीत थी ताकि लंदन के समय से तालमेल बैठ सके. लेकिन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने इस ‘गुलामी की निशानी’ को खत्म किया और यशवंत सिन्हा ने पहली बार सुबह 11 बजे बजट पढ़ना शुरू किया, जो आज तक जारी है.
तारीखों में भी बड़ा बदलाव साल 2017 में आया. पहले बजट फरवरी के आखिरी दिन (28 या 29 फरवरी) को आता था. मोदी सरकार ने इसे 1 फरवरी कर दिया ताकि नया वित्त वर्ष (1 अप्रैल) शुरू होने से पहले सारी तैयारियां पूरी हो सकें और राज्यों को फंड के लिए इंतजार न करना पड़े.
पुराने लोगों को याद होगा कि पहले रेल बजट अलग से आता था और उसका अलग ही क्रेज होता था. लेकिन 2017 में सरकार ने महसूस किया कि रेलवे को अलग रखने के बजाय देश की मुख्य अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ना बेहतर है. तब से रेल बजट को आम बजट का ही हिस्सा बना दिया गया.
बजट की सबसे दिलचस्प तस्वीर होती है वित्त मंत्री का हाथ में लिया हुआ बैग. सालों तक लाल या काले चमड़े के ब्रीफकेस की परंपरा चली, लेकिन 2019 में निर्मला सीतारमण ने इसे बदलकर भारतीय अंदाज में ‘बही-खाता’ (लाल कपड़े में लिपटा दस्तावेज) बना दिया. फिर 2021 में एक और बड़ी क्रांति हुई. बजट पूरी तरह पेपरलेस हो गया. अब वित्त मंत्री टैबलेट से बजट पढ़ती हैं और आम जनता के लिए ‘बजट ऐप’ पर सारी जानकारी एक क्लिक में मिल जाती है.
आजादी के समय जब आर.के. शनमुखम चेट्टी ने 26 नवंबर 1947 को पहला बजट पेश किया था, तब सारा जोर रोटी, कपड़ा और मकान पर था. लेकिन आज का भारत बदल चुका है. अब चर्चा सिर्फ खेती की नहीं, बल्कि स्टार्टअप, डिजिटल इंडिया, ग्रीन एनर्जी और आत्मनिर्भर भारत की होती है.
1860 में अंग्रेजों द्वारा शुरू किया गया यह सफर आज एक ऐसे मोड़ पर है जहां भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का ख्वाब देख रहा है. 1 फरवरी को आने वाला यह बजट न सिर्फ निर्मला सीतारमण के लिए एक निजी उपलब्धि होगा, बल्कि करोड़ों भारतीयों की उम्मीदों का नया रोडमैप भी तैयार करेगा.
-भारत एक्सप्रेस
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