CBI कोर्ट ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, औरंगाबाद (बिहार) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और तीन निजी व्यक्तियों को बैंक धोखाधड़ी मामले में तीन साल की कठोर कारावास और दो लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई
पटना स्थित सीबीआई मामलों की विशेष अदालत-1 ने एक बैंक धोखाधड़ी मामले में चार दोषियों को तीन साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई है. दोषियों में भारतीय स्टेट बैंक, नवीनगर, औरंगाबाद (बिहार) के तत्कालीन शाखा प्रबंधक पीके सिंह और तीन निजी व्यक्ति विष्णु कुमार सिंह, श्याम बिहारी सिंह और राम नरेश सिंह शामिल हैं. अदालत ने इन सभी पर कुल दो लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.
CBI ने यह मामला 1 अक्टूबर 1991 को दर्ज किया था. आरोप था कि पीके सिंह ने 1988 से 1990 के दौरान शाखा प्रबंधक के रूप में कार्य करते हुए अज्ञात व्यक्तियों के साथ आपराधिक साजिश रची. उन्होंने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी फर्मों और गैर-मौजूद व्यक्तियों को धोखाधड़ी से ऋण मंजूर किया और बैंक को 4,31,383 रुपये का नुकसान पहुंचाया, जबकि खुद और अन्य को अवैध लाभ दिया.
जांच में यह सामने आया कि पीके सिंह ने निजी व्यक्तियों के साथ मिलकर ऋण की मंजूरी दिखाने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए और 2,28,315 रुपये की राशि गैर-मौजूद व्यक्तियों के नाम पर स्वीकृत कर दी. भुगतान कई बैंकर चेक के माध्यम से निजी आरोपियों के खातों में दिखाया गया और आरोपियों को धनराशि प्राप्त हुई. तत्कालीन शाखा प्रबंधक ने इन फर्जी दस्तावेजों को पास कर राशि को गबन कर लिया. जांच में यह भी पता चला कि ऋण वितरण को दिखाने के लिए गैर-मौजूद फर्म के नाम से दस्तावेज तैयार किए गए थे, जिसे निजी आरोपियों द्वारा संचालित किया जा रहा था.
CBI ने जांच पूरी होने के बाद 31 मार्च 1995 को आरोपपत्र दायर किया था. अदालत ने सुनवाई के बाद सभी आरोपियों को दोषी ठहराया और उन्हें सजा सुनाई.
-भारत एक्सप्रेस
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