रिपोर्ट- लोकेश्वर सिन्हा
छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो बताती है कि अगर इरादे मजबूत हों और थोड़ा सा दिमाग लगाया जाए, तो कामयाबी कदम चूमती है. आज के दौर में जहां लोग छोटी-छोटी समस्याओं के आगे हार मान जाते हैं, वहीं अमलीपदर इलाके की ममता यादव ने अपने ‘देसी जुगाड़’ से ना सिर्फ खर्च बचाया, बल्कि एक ही सीजन में सवा लाख रुपये की कमाई कर ली.
ममता यादव की सफलता का सबसे दिलचस्प हिस्सा उनका वह जुगाड़ है, जिसकी चर्चा आज पूरे इलाके में हो रही है. गन्ने से रस निकालने के लिए आमतौर पर भारी-भरकम और महंगे डीजल पंप की जरूरत पड़ती है, जिसका खर्च भी काफी होता है. ममता ने इस खर्च को बचाने के लिए गन्ने की पेराई करने वाले चरखे को अपनी बाइक से जोड़ दिया. इस देसी इंजीनियरिंग का नतीजा यह रहा कि बिना भारी भरकम खर्च के गन्ने की पेराई शुरू हो गई और शुद्ध गुड़ तैयार होने लगा. उनके इस शुद्ध गुड़ की मांग इतनी है कि यह हाथों-हाथ बिक जाता है.
ममता इस काम में अकेली नहीं हैं. उनके पति जगराम यादव तो साथ देते ही हैं, साथ ही स्कूल की छुट्टी होने के बाद उनके बच्चे भी हाथ बंटाने पहुंच जाते हैं. महज 90 डिसमिल जमीन पर गन्ने की खेती करके ममता का परिवार आज आत्मनिर्भर बन चुका है. गन्ने की छंटाई से लेकर गुड़ बनाने की पूरी प्रक्रिया में उन्होंने गांव की दूसरी महिलाओं को भी काम दिया है, जिससे गांव में ही रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं.
ममता की यह यात्रा इतनी आसान नहीं थी. कभी मजदूरी पर निर्भर रहने वाली ममता पिछले 6 सालों से आजीविका मिशन की ‘बिहान’ योजना से जुड़ी हुई हैं. इस योजना के तहत मिले लोन और ट्रेनिंग ने उन्हें एक मजदूर से उद्यमी बना दिया. आज वह न सिर्फ खेती कर रही हैं, बल्कि बिजनेस के गुर भी सीख चुकी हैं.
गरियाबंद जिले में अमलीपदर क्लस्टर को सबसे सफल माना जा रहा है. यहां के आंकड़े वाकई चौंकाने वाले और प्रेरणादायक हैं:
ममता यादव जैसी महिलाएं आज समाज के लिए मिसाल हैं. उन्होंने साबित कर दिया कि खेती-किसानी सिर्फ मेहनत का काम नहीं, बल्कि दिमाग का भी खेल है. बाइक से गन्ना पेरने का उनका आइडिया न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल है (क्योंकि इसमें प्रदूषण कम है), बल्कि यह लागत घटाकर मुनाफ़ा बढ़ाने का बेहतरीन तरीका भी है.
अमलीपदर की क्लस्टर समन्वयक निधि साहू का कहना है कि ममता की सफलता ने दूसरी महिलाओं में भी नया जोश भर दिया है. अब गांव की महिलाएं सिर्फ घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे खुद का कारोबार खड़ा कर रही हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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