Cicada Covid Variant BA.3.2 India risk: वैश्विक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोविड-19 के एक नए वेरिएंट BA.3.2 को लेकर चेतावनी जारी की है, जिसे निकनेम ‘सिकाडा’ दिया गया है. यह वेरिएंट अब तक अमेरिका सहित दुनिया के 23 देशों में फैल चुका है. वैज्ञानिकों के अनुसार, सिकाडा वेरिएंट में 70 से 75 आनुवंशिक बदलाव (Genetic Mutations) देखे गए हैं, जो इसके स्पाइक प्रोटीन को पूरी तरह बदल देते हैं. यह वही हिस्सा है जिसके जरिए वायरस हमारे शरीर की कोशिकाओं पर हमला करता है.
इसके अलावा सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि हमारी मौजूदा वैक्सीन पुराने वेरिएंट्स (जैसे JN.1) को पहचानना जानती हैं, लेकिन सिकाडा के ‘बदले हुए हुलिए’ के कारण हमारा इम्यून सिस्टम इसे पहचानने में धोखा खा सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह वेरिएंट किसी अजनबी की तरह शरीर के सुरक्षा कवच में सेंध लगाने की क्षमता रखता है.
सिकाडा वेरिएंट की पहचान सबसे पहले नवंबर 2024 में अफ्रीका में हुई थी लेकिन 2026 की शुरुआत तक इसने वैश्विक स्तर पर रफ्तार पकड़ ली है. अमेरिका के 29 राज्यों में ‘वेस्टवॉटर’ यानी सीवेज के पानी की निगरानी के दौरान इस वायरस के सक्रिय निशान मिले हैं. यह इस बात का प्रमाण है कि भले ही अस्पतालों में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या अभी कम हो लेकिन संक्रमण समुदाय में बहुत चुपचाप और तेजी से फैल रहा है.
पल्मोनरी एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सिकाडा पुराने वेरिएंट्स से अधिक जानलेवा है या नहीं, इसके पुख्ता सबूत अभी नहीं मिले हैं, लेकिन इसकी ‘ट्रांसमिसिबिलिटी’ यानी फैलने की क्षमता पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ सकती है.
भारत में स्थिति फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन सतर्कता बढ़ा दी गई है. जीनोम सीक्वेंसिंग संस्था INSACOG ने देश में XFG वेरिएंट के 163 मामले दर्ज किए हैं, जो ओमिक्रॉन का ही एक म्यूटेटेड रूप है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के चलते ‘सिकाडा’ (BA.3.2) का भारत पहुँचना लगभग तय है.
हालांकि, भारत की बड़ी आबादी का हाइब्रिड इम्यूनाइजेशन (वैक्सीन और पिछले संक्रमण से मिली सुरक्षा) एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है. फिर भी विशेषज्ञों ने उन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है जो पहले से फेफड़ों की गंभीर बीमारी (Chronic Lung Disease) से जूझ रहे हैं या जिन्हें ‘लॉन्ग कोविड’ की समस्या रही है.
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सबसे बड़ा सवाल वैक्सीन की प्रभावशीलता को लेकर है. चूंकि सिकाडा वेरिएंट का स्पाइक प्रोटीन बहुत अधिक बदल चुका है, इसलिए मौजूदा बूस्टर डोज इसके खिलाफ ‘परफेक्ट मैच’ साबित नहीं हो रहे हैं. पल्मोनरी और क्रिटिकल केयर डॉक्टर्स का कहना है कि वैक्सीन अब भी मौत के खतरे और गंभीर स्थिति से बचाने में सक्षम है लेकिन यह संक्रमण को पूरी तरह रोकने में उतनी प्रभावी नहीं रह गई है.
डेटा के अनुसार, हर 100 में से 3 मामलों में ‘लॉन्ग कोविड’ के लक्षण विकसित हो रहे हैं, जो शरीर को लंबे समय तक कमजोर कर सकते हैं. ऐसे में बचाव ही सबसे बड़ा हथियार है कि भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनना और स्वच्छता का पालन करना एक बार फिर जरूरी हो गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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