US Israel Iran Conflict: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी महायुद्ध के बादल अब और गहरे होते जा रहे हैं. एक तरफ जहां अमेरिकी नौसेना के दो मरीन एसॉल्ट जहाज USS ट्रिपोली और USS बॉक्सर पूरी गति से ईरान की ओर बढ़ रहे हैं, वहीं ईरान ने भी अमेरिका को करारा जवाब देने के लिए अपने 10 लाख ग्राउंड फाइटर्स को स्टैंडबाय पर रख दिया है. लेकिन इस युद्ध की सबसे चौंकाने वाली तस्वीर यह है कि अब इस जंग में ईरान की कमान 12 साल के बच्चों (child soldiers in iran) के हाथों में भी होगी. ईरान ने ‘राष्ट्रभक्ति’ की लहर के बीच सैन्य सहायकों की भर्ती उम्र घटा दी है.
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अधिकारी रहीम नडाली के मुताबिक, ईरान में एक विशेष पहल ‘फॉर ईरान’ (For Iran) चलाई जा रही है. युद्ध के इस माहौल में युवा और किशोर वॉलंटियर्स बड़ी संख्या में भर्ती केंद्रों पर पहुंच रहे हैं. युवाओं के इस जज्बे को देखते हुए IRGC ने युद्ध से जुड़े सहायक कामों में हिस्सा लेने की न्यूनतम उम्र अब घटाकर 12 साल कर दी है. अधिकारी का दावा है कि 12 और 13 साल के बच्चे खुद आगे बढ़कर देश के लिए जान की बाजी लगाने की मांग कर रहे हैं.
भले ही ये 12-13 साल के मासूम हैं, लेकिन इन्हें दी गई जिम्मेदारियां बेहद गंभीर हैं. इन बच्चों को सड़कों पर गश्त करने, सैन्य चेकपॉइंट्स संभालने और युद्ध के लिए लॉजिस्टिक्स (रसद) पहुंचाने जैसे अहम टास्क सौंपे गए हैं. राजधानी तेहरान में जगह-जगह बासिज चेकपॉइंट्स बनाए गए हैं. स्थानीय निवासियों के अनुसार, सड़कों पर एक तरफ जहां भारी हथियारों से लैस सेना के ट्रक खड़े हैं, वहीं दूसरी तरफ सबमशीन गन थामे किशोर कारें रोककर लोगों की चेकिंग कर रहे हैं.
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तेहरान की तस्नीम न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक, ईरान के भर्ती केंद्रों पर नागरिकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. ऐसा माना जा रहा है कि यह भीड़ अमेरिका के साथ संभावित ज़मीनी युद्ध की तैयारियों का हिस्सा है. बासिज और IRGC द्वारा संचालित केंद्रों पर अब तक लाखों लोग वॉलंटियर के रूप में जुड़ चुके हैं, जो दिखाता है कि ईरान किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है.
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