मध्य प्रदेश में कफ सिरप के सेवन से बच्चों की मौत का गंभीर मामला सामने आया है. पिछले 23 दिनों के भीतर राज्य में कुल 11 मासूमों ने इस सिरप के कारण अपनी जान गंवाई है. यह घटनाएं प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं पर गहरे सवाल खड़े कर रही हैं और लोगों में भय का माहौल बना हुआ है.
मिली जानकारी के अनुसार, छिंदवाड़ा जिला इसे सबसे अधिक प्रभावित है. यहां अब तक 9 बच्चों की मौत कफ सिरप से हो चुकी है. हाल ही में 3 बच्चों ने दम तोड़ा है, जबकि इससे पहले 6 मासूम अपनी जान गंवा चुके थे. लगातार हो रही इन मौतों ने इलाके में दहशत फैला दी है. grieving परिवारों का कहना है कि उनके बच्चों को साधारण खांसी-जुकाम के लिए दवा दी गई थी, लेकिन दवा ही उनके लिए घातक साबित हुई.
यह मामला सिर्फ मध्य प्रदेश तक सीमित नहीं है. राजस्थान के भरतपुर और सीकर जिलों से भी ऐसी ही घटनाओं की जानकारी हुई है. भरतपुर में एक और सीकर में भी एक बच्चे की मौत कफ सिरप के कारण हुई है. इससे साफ होता है कि समस्या क्षेत्रीय न होकर बड़े स्तर पर फैली हुई है, जो दवा आपूर्ति और गुणवत्ता नियंत्रण की गंभीर खामियों को उजागर करती है.
लगातार हो रही इन मौतों से परिजनों और स्थानीय लोगों में गहरा गुस्सा है. उनका कहना है कि सरकार और स्वास्थ्य विभाग को तुरंत जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई करनी चाहिए. लोगों का यह भी आरोप है कि घटिया और असुरक्षित दवाएं खुलेआम बाजार में उपलब्ध हैं, जिन पर नियंत्रण नहीं है.
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विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला गंभीर लापरवाही का परिणाम है. यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह हो सकती है. अब प्रदेश के साथ-साथ देशभर में यह बहस छिड़ गई है कि बच्चों के लिए बाजार में बिक रही दवाओं पर निगरानी क्यों नहीं की जा रही है.
राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (RMSCL) ने सिरप के 19 बैचों की बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. स्वास्थ्य विभाग ने माता-पिता, डॉक्टरों और मेडिकल संचालकों को सतर्क रहने की सलाह जारी की है.
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-भारत एक्सप्रेस
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