Bharat Express DD Free Dish

JNU ने दोहराया इतिहास! ‘रावण दहन’ पर महासंग्राम; दशहरा बना राजनीतिक दंगल

Ravan Dahan Controversy In JNU: दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में रावण दहन के दौरान जमकर बवाल हुआ. एबीवीपी और लेफ्ट समर्थित छात्रों के बीच हुए विवाद में दोनों तरफ से आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए हैं. इस विवाद के जड़ में रावण पर मार्क्स, शरजील इमाम, उमर खालिद थी.

Ravan Dahan Controversy In JNU

दशहरा बना राजनीतिक दंगल

Ravan Dahan Controversy In JNU: जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) इस बार विजयादशमी के पावन पर्व पर एक बार फिर ‘जंग का मैदान’ बन गया. रावण दहन का यह पारंपरिक उत्सव, बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक होने के बजाय परिसर में मौजूद छात्र संगठनों के बीच राजनीतिक और सांस्कृतिक टकराव का नया अध्याय लिख गया. विवाद तब गहराया जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) द्वारा जलाए गए रावण के पुतले के 10 सिरों में दिल्ली दंगों के आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे व्यक्तियों की तस्वीरें लगाई गईं. इसके बाद जो हुआ वह केवल नारेबाजी तक सीमित नहीं रहा.

ABVP ने लेफ्ट छात्रों पर कार्यक्रम बिगाड़ने और जूते फेंकने का आरोप लगाया, जबकि JNUSU ने पलटवार करते हुए कहा कि ABVP धर्म का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है. साफ है कि JNU में दशहरा का पर्व अब केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि वैचारिक वर्चस्व की लड़ाई बन चुका है.

‘सांस्कृतिक आक्रामकता बर्दाश्त नहीं’

एबीवीपी छात्र नेता मयंक पंचाल ने कहा कि जेएनयू का वातावरण हमेशा से विविधता और उत्सव धर्मिता से समृद्ध रहा है.10 दिनों तक विद्यार्थियों ने मां दुर्गा की भक्ति में सहभागिता की, जिससे विश्वविद्यालय का सांस्कृतिक सौंदर्य और अधिक प्रखर हुआ, लेकिन वामपंथी छात्र संगठनों ने इस पवित्र आयोजन को भी हिंसा और घृणा से कलंकित किया. ये केवल एक धार्मिक आयोजन पर हमला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय की उत्सवधर्मी परंपरा और विद्यार्थियों की आस्था पर सीधा प्रहार है. एबीवीपी किसी भी कीमत पर ऐसी सांस्कृतिक आक्रामकता को बर्दाश्त नहीं करेगी.

‘ये विश्वविद्यालय के भाईचारे पर हमला’

JNUSU के संयुक्त सचिव वैभव मीणा ने कहा कि आज वामपंथी छात्रों ने जिस तरह शोभायात्रा में हिंसा की और छात्राओं पर पत्थरबाजी तक की, उससे ये सिद्ध हो गया कि उन्हें भारतीय संस्कृति और हिंदू परंपराओं से गहरी नफरत है. यह केवल छात्रों पर हमला नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय के सांस्कृतिक सौहार्द और भाईचारे पर सीधा प्रहार है. दुर्भाग्य है कि जो संगठन स्वयं को प्रगतिशील कहते हैं, वही सबसे अधिक त्योहारों और भारतीय मूल्यों का अपमान करते हैं. जेएनयूएसयू इस घटना की कड़ी निंदा करता है और प्रशासन से मांग करता है कि तुरंत और कठोर कार्रवाई कर परिसर में शांति और सांस्कृतिक सौहार्द को पुनः स्थापित किया जाए.

ये भी पढ़ें: रत्तीभर अपमान नहीं सहेगा पीएम मोदी का हिंदुस्तान, पुतिन की ट्रंप को चेतावनी; दबाव बनाना बंद करे अमेरिका

पुराना है JNU और विवाद का इतिहास

यह कोई नई बात नहीं है है. 2016 में भी रावण दहन के पुतले पर मंत्रियों के चेहरे लगाए गए थे और 2014 में महिषासुर शहादत दिवस पर विवाद हुआ था. यह लगातार होता टकराव JNU प्रशासन के सामने परिसर के सांस्कृतिक सौहार्द और भाईचारे को पुनः स्थापित करने की एक बड़ी चुनौती पेश करता है. जब तक छात्र संगठन राजनीतिक एजेंडे को सांस्कृतिक मंचों से दूर नहीं रखेंगे, JNU में दशहरा जैसे पर्व शांति और उत्सव के बजाय टकराव और हिंसा का कारण बनते रहेंगे.



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read