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फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका, ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया पर उठी रोक लगाने की मांग

सुप्रीम कोर्ट में फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन को लेकर जनहित याचिका दायर की गई है. यह जनहित याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील रुद्र विक्रम सिंह ने दायर की हैं. दायर जनहित याचिका में फर्जी जीएसटी के बढ़ते मामलों पर कड़ा रुख अख्तियार करने की मांग की गई है.

दस्तावेज चुराकर बन रहे फर्जी फर्म

जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि देशभर में चोरी हुए पैन कार्ड और आधार कार्ड के जरिए बड़ी संख्या में फर्जी कंपनियां बनाई जा रही है. साथ ही ऑटो-अप्रूवल का गलत इस्तेमाल करके जीएसटी नंबर हासिल किए जा रहे हैं. याचिका में कहा गया है कि कई साइबर अपराधी और टैक्स फ्रॉड नेटवर्क, असली लोगों के व्यक्तिगत दस्तावेज चुराकर उनके नाम पर फर्जी फर्म बना रहे है. इन फर्मों को कुछ ही घंटों में ऑटोमेटिक सिस्टम से गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स आइडेंटिफिकेशन नंबर (जीएसटीआईएन) मिल जाता है. नंबर मिलने के बाद इन फर्मों का इस्तेमाल इनपुट टैक्स क्रेडिट फ्रॉड, फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी किया जाता है.

ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया पर रोक की मांग

दायर जनहित याचिका में मांग की गई है कि फर्जी जीएसटी रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए ऑटो-अप्रूवल प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए, जीएसटी रजिस्ट्रेशन से पहले पैन कार्ड और आधार कार्ड वेरिफिकेशन को अनिवार्य रूप से मजबूत किया, फर्जी रजिस्ट्रेशन को ट्रैक करने और रद्द करने के लिए नेशनल लेवल पर निगरानी तंत्र बनाया जाए या इसकी जांच सीबीआई से कराई जाए, जिन लोगों के पैन कार्ड या आधार कार्ड का दुरुपयोग अभी तक हुआ है, उनके लिए सुरक्षा और मुआवजा देने का आदेश दिया जाए और मामले में केंद्र सरकार और जीएसटी काउंसिल को एक्शन प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश देने की मांग की गई है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 2 सालों में देशभर में 1.25 लाख से अधिक फर्जी जीएसटीआईएन रद्द किए जा चुके हैं. इन मामलों में हजारों करोड़ रुपये के टैक्स फ्रॉड का खुलासा हुआ है. याचिकाकर्ता के मुताबिक सरकारी ऑटो-अप्रूवल व्यवस्था का दुरुपयोग कर फर्जी कंपनियां बनाना आसान हो गया है. इससे न सिर्फ राजस्व को नुकसान हो रहा है बल्कि आम नागरिकों की निजी जानकारी भी खतरे में है.

37.85 लाख के फर्जी इनवॉइस

याचिका में यह भी कहा गया है कि अक्टूबर 2023 में कर्नाटक के बेल्लारी में रुद्र विक्रम सिंह के पैन GLSPS97975F और नकली हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर आरवीएस इंटरप्राइजेज नाम की एक फर्जी फर्म रजिस्टर की गई. उन्होंने कहा कि बिना किसी आधार ऑथेंटिफिकेशन या e-किसी के 37.85 लाख के फर्जी इनवॉइस जारी किए गए. आरटीआई के जरिए यह खुलासा हुआ है कि बिना किसी दस्तावेजों की जांच के यह रजिस्ट्रेशन पूरी तरह से ऑटो-अप्रूवल सिस्टम से हुआ था.

याचिकाकर्ता का दावा है कि फर्जी दस्तवेज़ों के माध्यम से हजारों शेल कंपनियां रजिस्टर की गई है. 2018 में डीजीसीआई ने 20 शेल कंपनियों का 1200 करोड़ का घोटाले का पर्दाफाश किया है. 2020 में सरकार ने राज्यसभा में बताया कि अब तक 11377 करोड़ से अधिक का घोटाले का पर्दाफाश हुआ है. 2021 में तीन महीने में ही 20124 करोड़ के फर्जी रजिस्ट्रेशन के केस सामने आए. दिसंबर 2023 तक 21791 फर्जी रजिस्ट्रेशन की पहचान हो चुकी थी, जिनसे 24000 करोड़ रुपये की टैक्स चोरी हुई.

ये भी पढ़ें: पति पूरी रकम या ईएमआई भरने के आधार पर पूरी संपत्ति पर मालिकाना हक का दावा नहीं कर सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

-भारत एक्सप्रेस

गोपाल कृष्ण

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