मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब पूरी तरह चुनावी रंग में आ चुका है. नामांकन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मैदान में कुल 22 उम्मीदवार रह गए हैं. हालांकि सीधी टक्कर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच मानी जा रही है, लेकिन ट्रांसजेंडर नेता संजना सिंह किन्नर की उम्मीदवारी ने इस मुकाबले को एक नया सामाजिक पहलू भी दे दिया है.
इस सीट पर भाजपा ने आशुतोष तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है. पार्टी पूरी ताकत के साथ चुनाव मैदान में उतरी है और उसका लक्ष्य उस सीट को दोबारा हासिल करना है, जहां 2023 के विधानसभा चुनाव में उसे बड़ा झटका लगा था. भाजपा अपनी मजबूत संगठन व्यवस्था और कार्यकर्ताओं के नेटवर्क के भरोसे मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.
वहीं, कांग्रेस ने घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है. पार्टी की कोशिश है कि वह इस सीट पर अपना कब्जा बनाए रखे. दरअसल, यह उपचुनाव कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता खत्म होने के बाद हो रहा है. धोखाधड़ी के एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था.
राजेंद्र भारती ने 2023 के विधानसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर करते हुए भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को 7,742 वोटों से हराया था. उनकी जीत ने दतिया में भाजपा के लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक प्रभाव को चुनौती दी थी.
दतिया को मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सीटों में गिना जाता है. यही वजह है कि इस उपचुनाव को दोनों प्रमुख दलों के लिए प्रतिष्ठा की लड़ाई माना जा रहा है. भाजपा के लिए जीत सिर्फ एक सीट वापस पाने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि यह 2023 की हार के बाद क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने का संदेश भी देगी.
दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए यह चुनाव अपनी जमीनी ताकत साबित करने का मौका है. पार्टी चाहती है कि विधायक की अयोग्यता के कारण पैदा हुई स्थिति के बावजूद उसका जनसमर्थन कायम रहे.
इस चुनाव में संजना सिंह किन्नर की उम्मीदवारी भी लोगों का ध्यान खींच रही है. उन्होंने ट्रांसजेंडर समुदाय की भागीदारी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व जैसे मुद्दों को चुनावी चर्चा में जगह दी है. भले ही उन्हें भाजपा और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबले का दावेदार नहीं माना जा रहा, लेकिन उनके अभियान ने खासकर युवाओं और शहरी मतदाताओं के बीच चर्चा जरूर पैदा की है.
इससे दतिया का चुनाव केवल दो बड़े राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि इसमें सामाजिक प्रतिनिधित्व और नए राजनीतिक मुद्दों की भी झलक दिखाई दे रही है. चुनाव आयोग ने दतिया उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान की तारीख तय की है, जबकि मतगणना 3 अगस्त को होगी. चुनाव की तैयारियां तेजी से चल रही हैं.
इस बार ईवीएम को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई है. एक बैलेट यूनिट में 16 उम्मीदवारों का नाम ही प्रदर्शित किया जा सकता हैं, जबकि दतिया में उम्मीदवारों की संख्या 22 है. ऐसे में हर मतदान केंद्र पर दो बैलेट यूनिट वाली ईवीएम लगाई जाएंगी. चुनाव आयोग ने मतदाताओं से अपील की है कि वो वोट डालते समय दोनों बैलेट यूनिट को ध्यान से देख ले.
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-भारत एक्सप्रेस
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