सीएम रेखा गुप्ता के कड़े प्लान
Delhi Winter Action Plan: अक्टूबर की हल्की गुलाबी ठंड के बीच सुबह की हवा में धुएं और धुंध की तीखी गंध घुलना शुरू हो गई है. दिल्लीवालों के जेहन में पिछले सालों के उस घुटन भरे मंजर की यादें ताजा हो रही है. आंखों में जलन, वही बच्चों और बुजुर्गों की घरघराती सांसें और वही दमघोंटू ‘गैस चैंबर’ जैसी फिजा घबराहत पैदा करने वाली है. लेकिन इस बार विंटर सीजन में सरकार ने प्रदूषण के खिलाफ आर-पार की जंग छेड़ते हुए राजधानी पर 1 नवंबर से 28 फरवरी तक पाबंदियों का शिकंजा कसने का फैसला किया है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में तैयार किए गए ‘विंटर एक्शन प्लान’ का मूल मंत्र बिल्कुल साफ है. अगर नियम तोड़े, तो शहर में न गाड़ी चलेगी, न पेट्रोल मिलेगा और न ही निर्माण कार्य होगा. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘राइट टू ब्रीथ’ (सांस लेने का अधिकार) की रक्षा के लिए अब कोई भी रियायत नहीं दी जाएगी.
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राजधानी की सड़कों पर होने वाले जहरीले धुएं को रोकने के लिए सरकार ने सीधे पेट्रोल पंपों और सीमाओं (बॉर्डर्स) पर पहरा बैठाने का खाका तैयार किया है.
दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर सख्त (No PUC No Fuel rule in Delhi) नीति लागू होगी. यदि आपके वाहन का वैध प्रदूषण प्रमाण पत्र नहीं है, तो पेट्रोल या डीजल नहीं मिलेगा. दिल्ली की सीमाओं से 1 नवंबर से BS-6 मानक से नीचे के किसी भी बाहरी वाहन को राजधानी के भीतर प्रवेश (BS-VI vehicle ban Delhi border entry) की अनुमति नहीं होगी.
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अत्यधिक धुआं छोड़ने वाले और बिना पीयूसी वाले वाहनों को सीधे जब्त किया जाएगा. प्रतिबंधों के दौरान आम जनता की सुविधा के लिए अतिरिक्त ईवी बसें, मेट्रो के बढ़े हुए फेरे और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत की जा रही है. नागरिकों से कारपूलिंग की भी अपील की गई है.
सर्दियों में हवा को सबसे ज्यादा जहरीला बनाने वाली उड़ती धूल (Construction Dust) को जड़ से खत्म करने के लिए कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर पूरी तरह ताला लगाया जा रहा है. पूरी दिल्ली में किसी भी नए भवन निर्माण और ध्वस्तीकरण (Demolition) गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा. सड़कों पर धूल फैलाने वाले कंस्ट्रक्शन मटेरियल (रेत, सीमेंट, रोड़ी) के परिवहन पर भी रोक रहेगी.
बंद पड़ी सभी कंस्ट्रक्शन साइट्स (Construction ban in Delhi winter months) पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से लैस कैमरे लगाए जा रहे हैं, जिनका सीधा लिंक दिल्ली सरकार के सेंट्रलाइज्ड ‘कमांड एंड कंट्रोल सेंटर’ से होगा. यदि किसी ने छिपकर भी काम शुरू किया, तो सिस्टम तुरंत अलर्ट भेज देगा.
सड़कों पर एक साथ उमड़ने वाले वाहनों के रेले और पीक-आवर के ट्रैफिक जाम से निपटने के लिए वर्क कल्चर में बड़ा बदलाव लागू किया जा रहा है. सभी सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी स्टाफ के लिए अनिवार्य ‘वर्क फ्रॉम होम’ (WFH) लागू कराया जाएगा. दफ्तरों के खुलने और बंद होने के समय में अंतर रखा जाएगा ताकि सुबह और शाम को सड़कों पर ट्रैफिक का दबाव कम रहे.
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सर्दियों के ये चार महीने दिल्ली के हर नागरिक के लिए परीक्षा की घड़ी होते हैं. कड़े प्रतिबंध और जुर्माने व्यवस्था का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन स्वच्छ हवा की मंजिल तभी हासिल होगी जब हर नागरिक इसे अपनी साझी लड़ाई समझेगा. कारपूलिंग अपनाना, निजी वाहनों का उपयोग घटाना और पीयूसी नियमों का स्वेच्छा से पालन करना केवल चालान से बचने का जरिया नहीं, बल्कि हमारे अपने बच्चों और बुजुर्गों को साफ हवा देने का सबसे जरूरी मानवीय कर्तव्य है.
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