Yamuna Cleaning Project Delhi: झाग की सफेद चादर, किनारों पर जमा कचरा और उठती दुर्गंध दशकों से राजधानी में यमुना की यही बदहाल तस्वीर देश में चर्चा का विषय बनी रही है. आस्था की डुबकी हो या छठ पर्व के अर्घ्य का समय, यमुना की गंदगी हर बार व्यवस्था पर तीखे सवाल दागती आई है. लेकिन अब दिल्लीवासियों का इंतजार खत्म होने की कगार पर है. सरकार ने साफ कर दिया है कि अब यमुना सिर्फ बहती हुई मैली नदी नहीं रहेगी, बल्कि इसके कायाकल्प का ऐसा मास्टरप्लान जमीन पर उतर रहा है जो राजधानी के स्वरूप को हमेशा के लिए बदल देगा.
दिल्ली को अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की तर्ज पर नया रूप देने के लिए दिल्ली सरकार और केंद्र ने करीब 8,991 करोड़ रुपये की 43 परियोजनाओं का खाका खींच लिया है. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण कर इस ऐतिहासिक बदलाव की नींव रखेंगे.
10 जल परियोजनाओं का लोकार्पण और 33 नई परियोजनाओं की शुरुआत शामिल है, जिसका सीधा मकसद यमुना में गिरने वाले सीवेज को रोकना, लीकेज बंद करना और हर घर तक 24 घंटे साफ पानी पहुंचाना है.
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यमुना में जहर घोलने वाले 22 बड़े नालों पर अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किए जाएंगे, जिससे अशोधित पानी सीधे नदी की धारा में न मिले. नालों के पानी को पूरी तरह ट्रीट और रिसाइकिल करके बागवानी व अन्य उपयोगों में लाया जाएगा. इसके तहत एशिया के सबसे बड़े ओखला सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की क्षमता को बढ़ाकर 56.4 करोड़ लीटर प्रतिदिन किया जा रहा है, साथ ही रिठाला एसटीपी का भी व्यापक आधुनिकीकरण होगा.
दिल्ली में पेयजल की बर्बादी और लीकेज वर्तमान में 30 से 45 फीसदी के बीच है, जिसे आधुनिक तकनीक के दम पर अगले 3 साल के भीतर 15 फीसदी से नीचे लाने का लक्ष्य रखा गया है. लगभग 30 लाख गैर-पंजीकृत पानी के कनेक्शनों को वैध किया जाएगा. आपूर्ति व्यवस्था में स्मार्ट फ्लो मीटर, क्लोरीन और प्रेशर सेंसर लगाए जा रहे हैं ताकि बूंद-बूंद पानी का हिसाब रहे. इसके साथ ही गर्मियों में हरियाणा से आने वाले पानी में अमोनिया की समस्या से निपटने के लिए ओखला में 6 MGD अमोनिया रिमूवल तकनीक अपनाई जा रही है.
अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट की सफलता को दिल्ली अपनी भौगोलिक परिस्थितियों के अनुसार अपनाएगी. इसके लिए गुजरात के साबरमती रिवरफ्रंट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के साथ एमओयू (MoU) करने की तैयारी है.
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किसी भी ऐतिहासिक शहर की पहचान उसकी नदी की सेहत से आंकी जाती है. लंदन की टेम्स और पेरिस की सीन नदी की तरह यमुना का स्वच्छ होना केवल पर्यावरणीय जरूरत नहीं, बल्कि दिल्ली के स्वाभिमान का सवाल है. ढाई साल के भीतर 100 फीसदी सीवर शोधन और साबरमती जैसा जीवंत किनारा मिलने के बाद दिल्लीवाले शाम को कंक्रीट के जंगलों से निकलकर स्वच्छ हवा और बहते नीले पानी के बीच सांस ले सकेंगे. यह 8,000 करोड़ का निवेश सिर्फ कंक्रीट और पाइपलाइन का नहीं, बल्कि दिल्ली की नई सांस्कृतिक पहचान गढ़ने का संकल्प है.
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