NCP SP Sharad Pawar
Delimitation Bill: बुधवार को महाराष्ट्र से एक ऐसी खबर आई, जिसने देश की संसद से सड़क तक बहस तेज कर दी. पूर्व मुख्यमंत्री शरद पवार (Sharad Pawar) की एनसीपी (NCP SP) मानसून सत्र में NDA के परिसीमन बिल (Delimitation Bill) का समर्थन करेगी. सूत्रों की मानें तो NCP (SP) का यह फैसला अंतिम माना जा रहा है. इसके बाद से दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र तक राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है.
हालांकि, परिसीमन बिल पर सरकार का समर्थन करने के सवाल पर सुप्रिया सुले ने कहा कि नया बिल संसद में आने के बाद ही NCP (SP) अपना रुख तय करेगी. उन्होंने कहा कि अगर सभी राज्यों में 50% सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव होता, तो इस मुद्दे पर सभी दलों की सहमति बन सकती थी.
बता दें कि हाल ही में बजट सत्र के दौरान राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार ने परिसीमन बिल संसद के पटल पर रखा था. हालांकि, दो-तिहाई बहुमत न होने के कारण इसे वापस लेना पड़ा. इसके बाद खुद पीएम मोदी ने कहा था, “आज हमारे पास नंबर नहीं हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए. हम फिर से कोशिश करेंगे.”
गौरतलब है कि पीएम मोदी के इस ऐलान के बाद देश में कई पार्टियों के गठजोड़ बिगड़ते दिखे. पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस में टूट देखने को मिली. वहीं तमिलनाडु में चुनाव के बाद कांग्रेस और DMK के बीच तल्खी साफ नजर आई. साथ ही महाराष्ट्र में शिवसेना (UBT) में भी फूट देखने को मिली. अब शरद पवार की पार्टी का NDA को समर्थन देना लगभग उन राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप माना जा रहा है, जो इस बिल के आसपास बनाए जा रहे है.
महिला आरक्षण (Women’s Reservation Bill) और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को लेकर सरकार एक बार फिर तैयारी में जुटी है. इसी साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र के दौरान यह बिल पेश किया गया था, लेकिन विपक्ष ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और विधेयक पास नहीं हो सका. उस समय बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े थे. सदन में 528 सांसद मौजूद थे और बिल पारित कराने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी. यानी सरकार 54 वोटों से पीछे रह गई थी.
अब सरकार के लिए समीकरण पहले से बेहतर नजर आ रहे हैं. शरद पवार की पार्टी NCP (SP) ने महिला आरक्षण और परिसीमन बिल का समर्थन करने का फैसला किया है, जिससे उसके 8 सांसद सरकार के साथ आ सकते हैं. इसके अलावा TMC के 20 बागी, UBT के 6 बागी और NCP (SP) के 8 सांसदों को जोड़ने पर सरकार का समर्थन 332 तक पहुंच सकता है. अगर DMK के 22 सांसद भी साथ आते हैं तो यह आंकड़ा 354 हो जाएगा, जो बिल पास कराने के लिए काफी करीब है.
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बिल पास करने के लिए NDA को 361 वोटों की जरूरत है जो दो तिहाई के बहुमत के आंकड़े के पास है. यानी सरकार को 361 में से सिर्फ 7 वोटों की कमी है. अब सरकार की नजर अन्य दलों पर भी है और वह मानसून सत्र में हर हाल में यह बिल पारित कराना चाहती है. बिल पास होने पर 2029 का लोकसभा चुनाव 800 से ज्यादा सीटों पर कराया जा सकता है.
-भारत एक्सप्रेस
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