Karnataka Cabinet expansion: कर्नाटक की सियासत से इस वक्त का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक फेरबदल सामने आ रहा है. लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान और कड़े सस्पेंस का अंत करते हुए आखिरकार कांग्रेस के ‘संकटमोचक’ माने जाने वाले डी.के. शिवकुमार (DK Shivakumar) कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री बन गए हैं. बेंगलुरु के लोक भवन स्थित भव्य ग्लास हाउस में आयोजित एक बेहद हाई-प्रोफाइल समारोह में राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री और जी. परमेश्वर को डिप्टी सीएम (Deputy CM) पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई.
बता दें कि इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल सहित दिल्ली के कई दिग्गज नेता विशेष रूप से बेंगलुरु पहुंचे थे.
कर्नाटक कांग्रेस में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर सिद्धरमैया और डीके शिवकुमार के बीच नेतृत्व की जंग किसी से छिपी नहीं थी. इस सियासी शह-मात के खेल का अंत तब हुआ जब कांग्रेस आलाकमान के कड़े निर्देश के बाद सिद्धरमैया ने 28 मई 2026 को अपने पद से आधिकारिक इस्तीफा दे दिया. सिद्धरमैया के पीछे हटते ही आठ बार के रिकॉर्ड विधायक और कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार बचाने वाले डीके शिवकुमार का वर्षों पुराना राजनीतिक सपना सच हो गया और राज्य की बागडोर पूरी तरह उनके मजबूत हाथों में सौंप दी गई.
डीके शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनते ही कर्नाटक में एक नए कैबिनेट का भी विस्तार किया गया है, जिसमें 14 कड़क मंत्रियों को शपथ दिलाई गई है. इस नई कैबिनेट में सबसे बड़ा और अनुभवी नाम के.एच. मुनियप्पा (KH Muniyappa) का है, जिन्हें मंत्री पद की शपथ दिलाई गई है. 78 वर्षीय मुनियप्पा कर्नाटक की राजनीति में कांग्रेस का एक बहुत बड़ा और कद्दावर दलित चेहरा हैं.
वहीं कोलार लोकसभा सीट से लगातार 7 बार सांसद और पूर्व केंद्रीय खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री रह चुके मुनियप्पा इस बार देवनहल्ली सीट से पहली बार विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचे हैं, जिन्हें शिवकुमार ने अपनी टीम में अहम जगह दी है.
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डीके शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाकर कांग्रेस आलाकमान ने संगठन के प्रति उनकी वफादारी और उनके चुनावी मैनेजमेंट का इनाम दिया है. हालांकि, सिद्धरमैया गुट को शांत रखना और 14 मंत्रियों के इस नए कुनबे के साथ सरकार को बिना किसी विवाद के आगे चलाना शिवकुमार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा.
बहरहाल, बेंगलुरु के ग्लास हाउस से शुरू हुआ यह नया अध्याय साफ करता है कि कर्नाटक की राजनीति अब एक बिल्कुल नए और आक्रामक दौर में प्रवेश कर चुकी है.
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-भारत एक्सप्रेस
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