ED Raids Delhi and Ghaziabad
ED Raids Delhi and Ghaziabad: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज एक हाउसिंग सोसाइटी घोटाले के सिलसिले में दिल्ली और उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में कई ठिकानों पर बड़ी छापेमारी की है. यह जांच एक रियल एस्टेट डेवलपर और सहकारी समिति (कोऑपरेटिव सोसाइटी) के अधिकारियों के खिलाफ चल रहे धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के मामले से जुड़ी हुई है.
आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की टीमें इस पूरी तलाशी प्रक्रिया को अंजाम दे रही हैं. यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत की जा रही है. ईडी की यह कार्रवाई ‘श्रस्थ प्रॉपबिल्ड प्राइवेट लिमिटेड’ के प्रमोटर संदीप सिंह और ‘सेवा सुरक्षा सहकारी आवास समिति’ के पदाधिकारियों के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर हो रही है.
जांच से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों ने गाजियाबाद के अकबरपुर बहरामपुर आवासीय इलाके में स्थित लगभग 41,544 वर्ग मीटर जमीन पर धोखाधड़ी की है. आरोप है कि इन लोगों ने सहकारी आवास समिति के सदस्यों को एक पुनर्विकास (रिडेवलपमेंट) परियोजना के तहत आवासीय फ्लैट देने का झांसा दिया था. इस झांसे में आकर सदस्यों ने जमीन पर अपने अधिकार सरेंडर कर दिए थे.
इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर समाज के सदस्यों से प्राप्त विकास अधिकारों (डेवलपमेंट राइट्स) का दुरुपयोग किया और धोखाधड़ी से सोसाइटी की जमीन और फ्लैटों को तीसरे पक्ष (थर्ड पार्टी) को बेच दिया. जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि इन अवैध सौदों से करोड़ों रुपये के ‘अपराध की कमाई’ (Proceeds of Crime) पैदा हुई है, जो अब एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानूनों के तहत जांच के दायरे में है. आज की छापेमारी का मुख्य उद्देश्य इस धोखाधड़ी से जुड़े सबूतों को इकट्ठा करना और फंड के लेन-देन का पता लगाना है.
इसी मामले से जुड़ी एक अन्य बड़ी अपडेट में, ईडी ने बीते 24 जून को 493 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ‘अल-फलाह ट्रस्ट’ के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया है. ईडी का कहना है कि आरोपी को अगर राहत मिली तो वह अपराध से अर्जित संपत्ति को इधर-उधर या नष्ट कर सकता है. सिद्दीकी ने अपनी पत्नी के कैंसर के इलाज के लिए छह सप्ताह की अंतरिम जमानत मांगी थी, जिस पर अगली सुनवाई 8 जुलाई को होनी है.
ईडी के अनुसार, सिद्दीकी एक ऐसी वित्तीय योजना का मुख्य साजिशकर्ता रहा है, जिसने विश्वविद्यालय की फर्जी नैक (NAAC) मान्यता, गलत यूजीसी दावों और राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को धोखा देकर ट्यूशन फीस के रूप में करोड़ों रुपये की अवैध वसूली की और उस फंड को अपने पारिवारिक व्यवसायों व विदेशी निवेशों में डायवर्ट कर दिया.
भारत एक्सप्रेस
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