लीगल

आधार-पासपोर्ट भी नहीं हैं नागरिकता का सबूत! तो फिर कौन सा डॉक्यूमेंट बचा? जानिए क्या हैं कानून

नागरिकता के प्रमाणपत्र को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है. पहले आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना गया. इसके बाद बिहार, पश्चिम बंगाल सहित अन्य राज्यों में एसआईआर हुआ. अब विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पासपोर्ट भारतीय नागरिकता का प्रमाण नहीं है.

भारत में नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक दस्तावेज नही है. अगर आप आधार, पासपोर्ट या राशन कार्ड को नागरिकता का सबूत मान रहे है तो आप गलत है.अब सवाल यह है कि जब आधार और पासपोर्ट नागरिकता साबित करने के लिए प्रमाण नहीं है, तो आखिर नागरिकता कौन से ऐसे दस्तावेज है जिसे साबित होगा. इसको लेकर अब सवाल उठने लगे है. जबकि पासपोर्ट अधिनियम 1967 के तहत पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जा सकता है. जारी करने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन, कई दस्तावेजों की जांच और संतुष्टि होती है. फिर भी सरकार इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नही मानती.

भारतीय नागरिकता के लिए कानूनी प्रावधान क्या कहते हैं?

चुनाव आयोग और सुप्रीम कोर्ट दोनों स्पष्ट कर चुका है कि आधार कार्ड को पहचान का प्रमाण है और ये नागरिकता साबित करने का दस्तावेज नहीं है. कोर्ट यह स्पष्ट कर चुका है कि आधार अधिनियम, 2016 और प्रतिनिधित्व ऑफ द पीपल एक्ट 1950 के तहत ये नागरिकता जन्मतिथि या निवास प्रमाण नहीं है. इसके अलावा पैन कार्ड या वोटर आईडी होने से कोई भारतीय नागरिक नहीं बन जाता है.

भारत में जन्मे लोग जन्म प्रमाणपत्र के जरिए ये साबित कर सकते हैं कि उनका जन्म भारत में हुआ है.

विदेश मंत्रालय ने कहा कि पासपोर्ट का मकसद इंटरनेशनल ट्रेवल को आसान बनाना है. पासपोर्ट जारी करने की प्रक्रिया में पूरी सावधानी और गहन जांच की जाती है. अधिकारियों के अनुसार पासपोर्ट केवल उन्हीं लोगों को जारी किया जाता है जिनकी पहचान और दस्तावेजों का पूरी तरह वेरिफिकेशन हो चुका हो. इसके लिए आधार, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजो का इस्तेमाल किया जाता है.

पंजाब सरकार के पूर्व एडिशनल एडवोकेट जनरल आर. के कपूर ने की माने तो 26 जनवरी 10950 से 1 जुलाई 1987 के बीच किसी व्यक्ति का जन्म इस अवधि में भारत में हुआ है, तो उसका जन्म प्रमाणपत्र अकेले ही भारतीय नागरिकता का पूर्ण प्रमाण माना जाता है. उस समय नागरिकता लेवल भारत में जन्म लेने के आधार पर मिल जाती थी, चाहे माता-पिता किसी भी देश के नागरिक हो.

वही 1 जुलाई 1987 से 3 दिसंबर 2004 के बीच जन्मे लोग के लिए जन्म प्रमाणपत्र के साथ यह भी साबित करना आवश्यक है कि जन्म के समय उसके माता-पिता में से कम से कम एक भारतीय नागरिक था.

यह भी पढ़ें:  अल फलाह यूनिवर्सिटी के मालिक जावेद सिद्दीकी की जमानत पर फंसा पेच, ईडी ने कोर्ट में खोली 415 करोड़ के घोटाले की पोल

-भारत एक्सप्रेस 

गोपाल कृष्ण

Recent Posts

अडानी एंटरप्राइजेज की लॉन्ग-टर्म रेटिंग में बड़ा सुधार: CARE Ratings से मिली अब तक की सबसे हाई ‘CARE AA’ रेटिंग

Adani Enterprises Credit Rating: CareEdge ने अडानी एंटरप्राइजेज की लॉन्ग-टर्म क्रेडिट रेटिंग बढ़ाकर CARE AA…

33 minutes ago

डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट और विदेश यात्रा! सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगी रिपोर्ट, बनाई जाएगी खास कमेटी

सुप्रीम कोर्ट ने दवा कंपनियों द्वारा डॉक्टरों को महंगे गिफ्ट, विदेश यात्राएं, कैश और अन्य…

42 minutes ago

‘थप्पड़, छीना फोन और फिर…’: मंत्री प्रवेश वर्मा के खिलाफ हाईकोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश

दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा नेता प्रवेश वर्मा के खिलाफ एक आम आदमी पार्टी…

47 minutes ago

सऊदी के समर में PAK एयरफोर्स की एंट्री: क्या यमन के दलदल और गृहयुद्ध में फंसने जा रहा है पाकिस्तान?

Saudi-Yemen War Pak Entry: सऊदी अरब के समर्थन में पाकिस्तान ने यमन के हूती विद्रोहियों…

57 minutes ago

‘उतनी ही लकड़ी लगनी है, मेरी लकड़ी जमा है…’, नाना पाटेकर ने हंसते-हंसते समझा दिया था जिंदगी का फलसफा

Nana Patekar: नाना पाटेकर की सबसे बड़ी खासियत यही थी कि उन्होंने कभी जिंदगी को…

1 hour ago