गुजरात के गांधीनगर में शनिवार को ‘नशा मुक्त भारत’ जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में युवाओं को नशे से दूर रहने और खेलों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने के लिए प्रेरित किया गया. खास बात यह रही कि जागरूकता फैलाने के लिए आधुनिक गतिविधियों के साथ भारत के पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया गया. कार्यक्रम की थीम ‘भारत के पारंपरिक खेलों का जश्न’ रखी गई थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को देश की खेल विरासत से जोड़ना और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करना था.
इस कार्यक्रम का आयोजन भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के नेताजी सुभाष चंद्र बोस वेस्टर्न सेंटर, गांधीनगर ने ‘माई भारत’ के साथ मिलकर किया. आयोजन के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नशे से दूर रहने, शारीरिक रूप से सक्रिय रहने और अनुशासित जीवन अपनाने में खेलों की अहम भूमिका हो सकती है.
कार्यक्रम में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई तरह के खेल और फिटनेस गतिविधियां आयोजित की गईं. इनमें लगोरी, रस्साकशी और बोरी दौड़ जैसे पारंपरिक खेल शामिल रहे. इन खेलों ने प्रतिभागियों को बचपन के पुराने खेलों से जुड़ने का मौका दिया, वहीं टीम वर्क, आपसी सहयोग और खेल भावना का महत्व भी समझाया.
इसके अलावा, नशा मुक्ति के संदेश को रोचक अंदाज में पहुंचाने के लिए सांप-सीढ़ी का विशेष खेल आयोजित किया गया. ‘नशे को हराएं’ थीम पर कॉइन टॉस और ‘फिटनेस चुनें’ के संदेश के साथ रिंग टॉस जैसी गतिविधियां भी कराई गईं. कार्यक्रम में ‘फिट इंडिया’ फिटनेस चैलेंज और पेनल्टी शूट-आउट ने भी प्रतिभागियों का ध्यान खींचा.
इन गतिविधियों के माध्यम से युवाओं को समझाने का प्रयास किया गया कि मनोरंजन और फिटनेस के लिए खेल एक बेहतर विकल्प हैं. साथ ही, पारंपरिक खेलों के जरिए नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध खेल संस्कृति से परिचित कराने पर भी जोर दिया गया.
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं पर्वतारोही निशा ने युवाओं के साथ जागरूकता सत्र में हिस्सा लिया. उन्होंने फिटनेस, अनुशासन, सहनशक्ति और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर बात की. उन्होंने युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रहने और अपनी ऊर्जा को सकारात्मक गतिविधियों में लगाने के लिए प्रेरित किया.
निशा ने बातचीत में कहा कि इस कार्यक्रम का हिस्सा बनकर उन्हें अच्छा लगा. उन्होंने कहा कि आज युवाओं तक नशा मुक्ति का संदेश पहुंचाना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही पारंपरिक खेलों को भी नई पीढ़ी तक पहुंचाने की जरूरत है, क्योंकि आज के कई बच्चों को इस बात की जानकारी नहीं है कि पहले किस तरह के खेल खेले जाते थे.
उन्होंने कहा कि जब इस तरह के आयोजनों के माध्यम से युवाओं को अच्छे संदेश दिए जाते हैं, तो यह काफी सकारात्मक अनुभव होता है. ऐसे कार्यक्रम युवाओं को खेलों से जोड़ने और उन्हें स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रेरित करने में मदद कर सकते हैं.
कार्यक्रम में ‘माई भारत’ गुजरात के स्टेट डायरेक्टर सचिन शर्मा, डिप्टी डायरेक्टर पंकज यादव और असिस्टेंट डायरेक्टर श्रेयांश सिंह भी मौजूद रहे. इनके अलावा नवसारी की जिला युवा अधिकारी अमृता सुराना, पाटन की जिला युवा अधिकारी काजल सहरावत और जामनगर के जिला युवा अधिकारी विशाल नागराले ने भी कार्यक्रम में भाग लिया.
जामनगर के जिला युवा अधिकारी विशाल नागराले ने कहा कि ‘नशा मुक्त भारत’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को नशे से दूर रखना जरूरी है, ताकि वे स्वस्थ जीवन जी सकें और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अपना योगदान दे सकें.
कार्यक्रम के अंत में विभिन्न पारंपरिक खेलों और गतिविधियों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया.
इस संयुक्त आयोजन के जरिए भारतीय खेल प्राधिकरण, गांधीनगर और ‘माई भारत’ ने युवाओं को खेल, फिटनेस और नशा मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई. कार्यक्रम का मुख्य संदेश यही रहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए केवल जागरूकता ही नहीं, बल्कि उन्हें खेलों और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ना भी जरूरी है.
भारत एक्सप्रेस
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