Global Indology Conclave: अहमदाबाद में अदाणी कॉर्पोरेट हाउस में आयोजित ग्लोबल इंडोलॉजी कॉन्क्लेव भारतीय सभ्यता और ज्ञान परंपरा को नई ऊर्जा देने का बड़ा मंच बना. इस तीन दिवसीय कार्यक्रम को अदाणी ग्रुप ने शिक्षा मंत्रालय के इंडियन नॉलेज सिस्टम्स (IKS) के साथ मिलकर आयोजित किया. इसका मकसद इंडोलॉजी यानी भारतीय दर्शन, भाषाओं, विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को वैश्विक स्तर पर फिर से स्थापित करना है.
कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में अदाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदाणी ने भारत नॉलेज ग्राफ बनाने की घोषणा की. उन्होंने कहा कि यह डिजिटल फ्रेमवर्क भारत की सभ्यतागत धरोहर को संरक्षित करने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने का काम करेगा. गौतम अदाणी ने इस मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का संस्थापक योगदान देने का ऐलान किया. उन्होंने इसे “सभ्यतागत ऋण की अदायगी” बताया.
इस कार्यक्रम में जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी मुख्य अतिथि रहे. उन्होंने कहा कि उनका सपना तभी सार्थक होगा जब भारत विश्वगुरु बनेगा. गौतम अदाणी की यह पहल उस सपने को साकार करने की दिशा में बड़ा कदम है.
अदाणी ग्रुप और IKS ने पांच साल का कार्यक्रम शुरू किया है जिसमें 14 पीएचडी स्कॉलर्स को समर्थन दिया जाएगा. ये शोधकर्ता भाषाविज्ञान, खगोलशास्त्र, पारंपरिक चिकित्सा, इंजीनियरिंग, राजनीति, साहित्य और विरासत अध्ययन जैसे विषयों पर काम करेंगे. उनका चयन IITs, IIMs और अन्य प्रमुख संस्थानों के परामर्श से किया गया है.
इस पहल का खास पहलू यह है कि पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक उपकरणों जैसे डेटा साइंस, सिस्टम थिंकिंग और मल्टीमॉडल आर्काइविंग से जोड़ा जाएगा. इससे इंडोलॉजी को समकालीन अकादमिक विमर्श और वैश्विक शोध में प्रासंगिक बनाया जा सकेगा.
गौतम अदाणी ने कहा कि अगर कोई सभ्यता अपने सांस्कृतिक और भावनात्मक ढांचे की रक्षा नहीं करती तो धीरे-धीरे मशीनों के एल्गोरिद्म मानव व्यवहार को प्रभावित करने लगते हैं. इस पहल का उद्देश्य भारत की सभ्यता को सुरक्षित रखना और दुनिया के सामने उसे प्रामाणिक रूप से प्रस्तुत करना है.
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अदाणी ग्रुप लंबे समय से “नेशन बिल्डिंग” और “ग्रोथ विद गुडनेस” की सोच के साथ काम करता रहा है. ऊर्जा, परिवहन, धातु, उपभोक्ता क्षेत्र और सामुदायिक विकास में इसकी भूमिका अहम रही है. इंडोलॉजी मिशन के लिए योगदान इस बात का प्रमाण है कि समूह भारत की सांस्कृतिक और शैक्षिक विरासत को भी उतनी ही प्राथमिकता देता है जितनी आर्थिक विकास को.
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-भारत एक्सप्रेस
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