हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान अभियान को गति देने और आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने को लेकर मैराथन बैठकों का दौर चला. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के मुख्य मीडिया सलाहकार सुदेश कटारिया की अध्यक्षता में जिलावार बैठकों का आयोजन हुआ और आगामी कार्यक्रमों की तिथियां निर्धारित की गई. 22 जुलाई को कालांवाली में दलित समुदाय हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान कार्यक्रम में एकजुटता की हुंकार भरेगा तो 26 जुलाई को शाहाबाद में युवा संविधान सम्मान का संकल्प लिया जाएगा.
रविवार को कुरुक्षेत्र स्थित हिरमी में ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल के मुख्य मीडिया सलाहकार सुदेश कटारिया ने जिलावार सरपंचों और गणमान्य लोगों से मुलाकात की. संविधान सम्मान समारोह समिति के प्रदेश संयोजक कुलदीप बेलरखां ने सुदेश कटारिया का अभिनंदन किया. विभिन्न जिलों से आए सरपंचों व गणमान्य लोगों ने शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया. कटारिया ने कहा कि दलित समुदाय अब विपक्ष की वोट बैंक की राजनीति को समझ चुका है.
दलित समुदाय को विपक्ष संविधान के नाम पर गुमराह करने की कोशिश में जुटा है, विपक्ष को जवाब देने के लिए ही हमारा संविधान-हमारा स्वाभिमान अभियान के तहत जिला, लोकसभा और विधानसभा स्तर पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें दलितों को न केवल विपक्ष के षड्यंत्र के बारे में अवगत कराया जा रहा है, बल्कि उन्हें यह भी विस्तार से बताया जा रहा है कि कांग्रेस ने हमेशा संविधान निर्माता डा. बीआर अंबेडकर को अपमानित करने का काम किया.
प्रदेश संयोजक कुलदीप बेलरखां ने बताया कि कुरुक्षेत्र में जिलावार बैठकों का दौर सुबह 10 बजे शुरू हुआ, जोकि सायं चार बजे तक चला. दिनभर अलग-अलग जिलों के सरपंचों व गणमान्य लोगों के साथ आगामी कार्यक्रमों की रणनीति तैयार की गई. आगामी कार्यक्रमों में दो अगस्त को रेवाड़ी, तीन अगस्त को मानेसर गुरुग्राम, नौ अगस्त को सिरसा और 10 अगस्त को इस्माईलाबाद कुरुक्षेत्र में कार्यक्रम प्रस्तावित हैं.
बैठक में डा. कपूर सिंह, एडवोकेट संजीव, ढकाला के सरपंच कुलविंद्र, समालखी के सरपंच सतीश, अजराना खुर्द के सरपंच सूरजभान और रतिया ब्लाक के सरपंच गुरचरण सहित कई जिलों के सरपंच और प्रबुद्धजन मौजूद रहे.
सुदेश कटारिया ने कहा कि साढ़े नौ साल बतौर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने दलितों को आगे बढ़ाने के साथ अंत्योदय उत्थान की भावना पर काम किया, मिशन मेरिट के आधार पर नौकरियों में सबसे ज्यादा फायदा दलितों को मिला. पढ़े लिखे युवाओें को न केवल योग्यता के आधार पर नौकरी मिली, बल्कि उनमें एक उम्मीद जगी कि बिना पर्ची-खर्ची नौकरी मिलना संभव है. संविधान सम्मान समारोह में दलितों को केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं बारे अवगत कराने के साथ उनकी समस्याओं का मौके पर ही निदान किया जाता है.
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भारत एक्सप्रेस
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