History of BJP Presidents
BJP Presidents List From 1980 To 2026: भारतीय जनता पार्टी (BJP) आज दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी है. 6 अप्रैल 1980 को अपनी स्थापना से लेकर जनवरी 2026 तक, यानी पिछले 45 साल और 9 महीनों में पार्टी ने शून्य से शिखर तक का सफर तय किया है. अब जब पार्टी को अपना नया ‘बॉस’ मिलने जा रहा है. यह जानना दिलचस्प है कि अब तक पार्टी की कमान किन 11 दिग्गजों के हाथों में रही है. इन 45 सालों में बीजेपी ने 14 अध्यक्षीय कार्यकाल देखे हैं, लेकिन चेहरा बदलने के बजाय पार्टी ने कई बार अपने पुराने सिपहसालारों पर भी भरोसा जताया है.
बीजेपी के गठन के बाद से अब तक 11 नेताओं ने अध्यक्ष पद संभाला है. इनमें अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कुशाभाऊ ठाकरे, बंगारू लक्ष्मण, के. जना कृष्णामूर्ति, एम वेंकैया नायडू, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अमित शाह और जेपी नड्डा शामिल हैं. अब 12वें चेहरे के रूप में नितिन नबीन का नाम लगभग तय माना जा रहा है.
बीजेपी के इतिहास में लालकृष्ण आडवाणी एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्हें तीन अलग-अलग मौकों पर पार्टी का अध्यक्ष बनने का गौरव प्राप्त हुआ. इससे पहले वह जनसंघ के भी अध्यक्ष रहे हैं.
आडवाणी के अलावा राजनाथ सिंह वो दूसरे नेता हैं, जिन्होंने दो अलग-अलग कार्यकालों में अध्यक्ष पद संभाला.
पहले बार अमित शाह को साल 2014 में राजनाथ सिंह के मंत्री बनने के बाद बचे हुए कार्यकाल के लिए अध्यक्ष बनाया गया. उसके बाद साल 2016 में उनका नए कार्यकाल के लिए चुनाव हुआ. ठीक इसी तरह अमित शाह के पद छोड़ने के बाद जेपी नड्डा साल 2020 में अध्यक्ष बने. हालांकि, लगातार कार्यकाल विस्तार के कारण उन्होंने करीब-करीब 2 कार्यकाल पूरे कर लिए हैं.
अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee 1980-86): ये पार्टी के पहले अध्यक्ष थे. उन्होंने जनसंघ की कट्टर छवि से अलग हटकर बीजेपी को एक उदारवादी और मध्यमार्गी पार्टी के रूप में खड़ा किया.
लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani 1986-90): वाजपेयी के बाद आडवाणी ने कमान संभाली और पार्टी को हिंदुत्व की विचारधारा की ओर मोड़ा. 1990 की राम रथ यात्रा इन्हीं के कार्यकाल में निकली, जिसने बीजेपी को चुनावी ताकत दी.
मुरली मनोहर जोशी (Murli Manohar Joshi 1991-93): इनके कार्यकाल में बीजेपी पहली बार संसद में मुख्य विपक्षी दल बनी. उन्होंने ‘एकता यात्रा’ में अहम भूमिका निभाई और राम जन्मभूमि आंदोलन को आगे बढ़ाया.
लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani 1993-98): दूसरी बार अध्यक्ष बने. इनके आक्रामक प्रचार की बदौलत 1996 में बीजेपी लोकसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
कुशाभाऊ ठाकरे (Kushabhau Thakre 1998-2000): ये संगठन के बेहद मजबूत नेता माने जाते थे. इनके कार्यकाल में एनडीए सरकार थी, इसलिए पार्टी ने गठबंधन धर्म निभाने के लिए हिंदुत्व के मुद्दों को थोड़ा नरम रखा.
बंगारू लक्ष्मण (Bangaru Laxman 2000-01): ये बीजेपी के पहले दलित अध्यक्ष बने. लेकिन एक साल बाद ही तहलका स्टिंग ऑपरेशन में रिश्वत के आरोपों के चलते उन्हें इस्तीफा देना पड़ा.
के. जन कृष्णामूर्ति (K Jana Krishnamurthi 2001-02): लक्ष्मण के इस्तीफे के बाद इन्होंने कमान संभाली. बाद में वाजपेयी सरकार में मंत्री बनने पर इन्होंने पद छोड़ दिया.
एम. वेंकैया नायडू (M. Venkaiah Naidu 2002-04): इनके अध्यक्ष बनने को आडवाणी गुट की पकड़ मजबूत होने के तौर पर देखा गया. 2004 के चुनाव में एनडीए की हार के बाद इन्होंने इस्तीफा दे दिया.
लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani 2004-05): तीसरी बार अध्यक्ष बने, लेकिन पाकिस्तान यात्रा के दौरान मोहम्मद अली जिन्ना को ‘धर्मनिरपेक्ष’ बताने पर विवाद हुआ और उन्हें पद छोड़ना पड़ा.
राजनाथ सिंह (Rajnath Singh 2005-09): आडवाणी का बचा हुआ कार्यकाल पूरा किया और 2006 में दोबारा चुने गए. यूपी के सीएम रह चुके राजनाथ ने दोबारा हिंदुत्व के एजेंडे पर जोर दिया.
नितिन गडकरी (Nitin Gadkari 2010-13): ये बीजेपी के सबसे युवा अध्यक्ष बने. आरएसएस के करीबी थे, लेकिन दूसरे कार्यकाल से ठीक पहले वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के कारण इस्तीफा देना पड़ा.
राजनाथ सिंह (Rajnath Singh 2013-14): गडकरी के जाने के बाद दूसरी बार अध्यक्ष बने. इन्हीं के कार्यकाल में विरोध के बावजूद नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार घोषित किया गया और पार्टी को प्रचंड जीत मिली.
अमित शाह (Amit Shah 2014-20): पीएम मोदी के सबसे करीबी. इनकी अगुवाई में बीजेपी ने कई राज्यों में सरकार बनाई. 2016 में ये दोबारा 3 साल के लिए चुने गए.
जगत प्रकाश नड्डा (Jagat Prakash Nadda 2020-वर्तमान): पहले कार्यकारी अध्यक्ष रहे, फिर पूर्ण अध्यक्ष बने. छात्र राजनीति से निकले नड्डा ने अमित शाह के बाद संगठन को मजबूती से आगे बढ़ाया.
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अब 20 जनवरी 2026 को बीजेपी को उसका 15वां अध्यक्ष (कार्यकाल के हिसाब से) और 12वां चेहरा मिलने जा रहा है, जो पार्टी को नए दौर में ले जाएगा. इसे लेकर दिल्ली में गहमा-गहमी बनी हुई है. बीजेपी ऑफिस में नेताओं का जमावड़ा शुरू हो गया है. वहीं मीडिया हाउस भी पूरी तरह से तैयार हो गए हैं.
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