India Pakistan Relations RSS: एक तरफ भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी घातक सैन्य कार्रवाई की यादें ताज़ा हैं, जिसमें सीमा पार आतंकी ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया गया था, तो दूसरी तरफ राष्ट्र के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक चौंकाने वाला परामर्श सामने आया है. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का हालिया बयान कि “बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए”, भारतीय कूटनीति के गलियारों में एक नई बहस छेड़ चुका है.
होसबाले ने अपने इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा का जिक्र कर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. यह संदेश ‘यथार्थवाद’ (Realism) पर आधारित है. संघ का मानना है कि सैन्य नेतृत्व और राजनीतिक सत्ता भले ही नफरत में डूबी हो, लेकिन ‘नागरिक समाज’ (Civil Society) के बीच पुल बनाना जरूरी है. यह भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के साथ एक नया प्रयोग है—एक हाथ में वज्र (ऑपरेशन सिंदूर) और दूसरे में संवाद की खिड़की.
विशेषज्ञ इसे भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘हार्ड पावर’ के संतुलन के तौर पर देख रहे हैं. इसके तीन प्रमुख मायने निकलते हैं
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘पहलगाम’ या ‘पुलवामा’ जैसे हमलों का जवाब कंक्रीट के हैंगरों में छेद करके ही दिया जाएगा, लेकिन पड़ोसी बदला नहीं जा सकता. “राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा” और “बातचीत की उम्मीद” के बीच यह संतुलन ही भारत की 2026 की नई विदेश नीति की धुरी है. क्या पाकिस्तान का नागरिक समाज इस खिड़की से झांकने का साहस दिखाएगा? यह आने वाला वक्त तय करेगा.
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