India Pakistan Relations RSS: एक तरफ भारत की ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी घातक सैन्य कार्रवाई की यादें ताज़ा हैं, जिसमें सीमा पार आतंकी ठिकानों को मलबे में तब्दील कर दिया गया था, तो दूसरी तरफ राष्ट्र के वैचारिक मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का एक चौंकाने वाला परामर्श सामने आया है. संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले का हालिया बयान कि “बातचीत के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए”, भारतीय कूटनीति के गलियारों में एक नई बहस छेड़ चुका है.
शक्ति और शांति का ‘वाजपेयी मॉडल’ (RSS Pakistan Statement)
होसबाले ने अपने इंटरव्यू में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की लाहौर बस यात्रा का जिक्र कर एक बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. यह संदेश ‘यथार्थवाद’ (Realism) पर आधारित है. संघ का मानना है कि सैन्य नेतृत्व और राजनीतिक सत्ता भले ही नफरत में डूबी हो, लेकिन ‘नागरिक समाज’ (Civil Society) के बीच पुल बनाना जरूरी है. यह भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के साथ एक नया प्रयोग है—एक हाथ में वज्र (ऑपरेशन सिंदूर) और दूसरे में संवाद की खिड़की.
RSS का पाकिस्तान पर बयान के मायने
विशेषज्ञ इसे भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और ‘हार्ड पावर’ के संतुलन के तौर पर देख रहे हैं. इसके तीन प्रमुख मायने निकलते हैं
- ग्लोबल इमेज: भारत दुनिया को यह दिखाना चाहता है कि वह एक जिम्मेदार और शांतिप्रिय परमाणु शक्ति है, जो उकसावे पर जवाब देना जानती है लेकिन युद्ध का शौकीन नहीं है.
- पीओके और कश्मीर का नया नैरेटिव: जब भारत नागरिक समाज, खेल और व्यापार की बात करता है, तो वह सीधे पाकिस्तानी आवाम को संबोधित कर रहा होता है, जिससे वहां की सेना के ‘भारत-विरोधी’ प्रोपेगैंडा की धार कुंद होती है.
- ट्रैक-2 कूटनीति की वापसी: होसबाले का वीजा, खेल और व्यापार जारी रखने का सुझाव संकेत देता है कि भारत ‘ट्रैक-2’ कूटनीति (गैर-सरकारी संवाद) के जरिए बर्फ पिघलाना चाहता है.
आत्मसम्मान बनाम कूटनीति (RSS Strategy On Pakistan)
संघ ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘पहलगाम’ या ‘पुलवामा’ जैसे हमलों का जवाब कंक्रीट के हैंगरों में छेद करके ही दिया जाएगा, लेकिन पड़ोसी बदला नहीं जा सकता. “राष्ट्र के आत्मसम्मान की रक्षा” और “बातचीत की उम्मीद” के बीच यह संतुलन ही भारत की 2026 की नई विदेश नीति की धुरी है. क्या पाकिस्तान का नागरिक समाज इस खिड़की से झांकने का साहस दिखाएगा? यह आने वाला वक्त तय करेगा.
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