AI द्वारा बनाई गई तस्वीर
Indian Army fire fighting robot: भारतीय सेना ने सैनिकों की जान को और अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में एक अहम पहल की है. सेना ने पहली बार अत्याधुनिक फायर-फाइटिंग रोबोट खरीदने का फैसला लिया है, जो आग लगने जैसी आपात और खतरनाक परिस्थितियों में बिना किसी मानव को जोखिम में डाले काम करेगा.
इस रोबोट की मदद से अब सैनिकों और अग्निशमन कर्मियों को सीधे आग की लपटों के बीच जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी. यह मशीन आग के बेहद करीब जाकर पानी या फोम का छिड़काव कर सकती है, जिससे आग पर तेजी और प्रभावी ढंग से काबू पाया जा सकेगा.
सेना ने इस तकनीक के लिए देश की स्टार्टअप कंपनी एम्प्रेसा प्राइवेट लिमिटेड के साथ करार किया है. यह सौदा रक्षा मंत्रालय की आईडेक्स (Innovation for Defence Excellence) योजना के तहत किया गया है, जिसका उद्देश्य देश में स्वदेशी रक्षा तकनीकों को बढ़ावा देना है.
दिलचस्प बात यह है कि यह फायर-फाइटिंग रोबोट पहले भारतीय नौसेना के लिए विकसित किया गया था. अब उसी तकनीक को सेना ने भी अपनाया है, जिससे यह साबित होता है कि एक सैन्य सेवा के लिए बनी तकनीक को अन्य सेवाएं भी प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकती हैं. इससे समय, लागत और संसाधनों की बचत होगी.
यह रोबोट पूरी तरह रिमोट कंट्रोल के जरिए संचालित किया जाता है. फायर-फाइटर सुरक्षित स्थान पर रहकर इसे ऑपरेट कर सकते हैं. यह मशीन तेज गर्मी, घने धुएं और कम दिखाई देने वाले इलाकों में भी काम करने में सक्षम है.
इसके अलावा, यह उन स्थानों तक भी पहुंच सकता है जहां इंसानों का जाना बेहद खतरनाक होता है. आकार में कॉम्पैक्ट और तकनीक में आधुनिक यह रोबोट एक मानव रहित ग्राउंड व्हीकल है, जिसे खासतौर पर जोखिम भरे इलाकों के लिए डिजाइन किया गया है.
सेना ने इस रोबोट को खरीदने से पहले इसके विस्तृत परीक्षण किए थे. ट्रायल के दौरान इसके प्रदर्शन को सफल और भरोसेमंद पाया गया, जिसके बाद इसे शामिल करने का निर्णय लिया गया. सेना के कई ठिकानों, जैसे गोला-बारूद भंडार, ईंधन डिपो और संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों में आग लगने का खतरा बना रहता है. ऐसे स्थानों पर यह रोबोट बेहद उपयोगी साबित होगा और आपात स्थितियों में तेज व सुरक्षित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करेगा.
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भारतीय सेना के मुताबिक यह फायर-फाइटिंग रोबोट न सिर्फ सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती देगा. यह पहल विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. यह तकनीक देश की रक्षा क्षमता को आधुनिक बनाने के साथ-साथ स्वदेशी नवाचारों को बढ़ावा देने का भी सशक्त उदाहरण है.
-भारत एक्सप्रेस
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