दुनिया की वित्तीय प्रणाली में एक शांत लेकिन शक्तिशाली बदलाव हो रहा है और यह फिनटेक की दुनिया के माध्यम से हो रहा है. पिछले महीने, अमेरिकी सीनेट ने GENIUS अधिनियम (GENIUS Act) पारित किया, जो एक ऐतिहासिक कानून है. यह अमेरिकी बैंकों और यहां तक कि अमेज़न और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियों को सार्वजनिक ब्लॉकचेन पर डिजिटल डॉलर जिन्हें स्टेबलकॉइन कहा जाता है जारी करने की कानूनी अनुमति देता है.
ये स्टेबलकॉइन सिर्फ एक और क्रिप्टोकरेंसी नहीं हैं. ये पूरी तरह से 1:1 अनुपात में अमेरिकी सरकार के ट्रेजरी बिल्स द्वारा समर्थित हैं. आसान शब्दों में कहें तो इसका मतलब है कि अमेरिका का कोई बैंक सरकारी बॉन्ड से समर्थित डॉलर का एक डिजिटल संस्करण जारी कर सकता है, जिसे दुनिया भर में भुगतान के रूप में उपयोग किया जा सकता है. यह सरकार की प्रतिभूतियों पर भरोसे और ब्लॉकचेन तकनीक की गति और पारदर्शिता को एक साथ लाता है.
जो बात सबसे महत्वपूर्ण है, वह यह कि यह बिल दलों की सीमाओं से परे जाकर 68 वोटों के साथ पारित हुआ है. यह दिखाता है कि अमेरिका इस पहल को अपने आर्थिक और रणनीतिक एजेंडे का एक गंभीर हिस्सा मानता है. लक्ष्य स्पष्ट है: डॉलर को और मजबूत बनाना, उधारी लागत को कम करना और एक डिजिटल-प्रथम वित्तीय प्रणाली की ओर अग्रसर होना.
“स्टेबलकॉइन्स अंततः अमेरिकी ट्रेजरी बिल्स के सबसे बड़े खरीदार बन सकते हैं. यदि आप नाइजीरिया में स्टेबलकॉइन का उपयोग कर रहे हैं, तो वह अमेरिकी डॉलर से समर्थित है.” यह एक समझदार डिजिटल कूटनीति है. जैसे-जैसे स्टेबलकॉइन्स वैश्विक स्तर पर फैलेंगे, अमेरिकी ऋण की मांग बढ़ेगी, उधारी लागत कम होगी और डॉलर का प्रभुत्व डिजिटल युग में और मजबूत होगा.”
RBI ने अनियमित क्रिप्टोकरेंसी को लेकर उचित चिंताएं व्यक्त की हैं, विशेष रूप से मौद्रिक नीति और उपभोक्ता संरक्षण के दृष्टिकोण से. लेकिन अमेरिका जो कर रहा है, वह अलग है. यह ब्लॉकचेन इन्फ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करके डिजिटल मुद्रा में सार्वजनिक विश्वास को मजबूत करने की बात है, वो भी बिना संप्रभुता या राजकोषीय नियंत्रण से समझौता किए.
भारत की भी यह महत्वाकांक्षा है कि वह अपनी सरकारी उधारी की लागत को घटाकर विकसित देशों के स्तर लगभग 3 प्रतिशत के करीब लाए, जो वर्तमान में लगभग 6 प्रतिशत है. लेकिन हमारे पारंपरिक उपकरण जैसे ब्याज दरों में कटौती सीमित हैं, क्योंकि इनके महंगाई पर असर पड़ते हैं जो घरेलू बचत की क्रय शक्ति को कम करते हैं. अमेरिका की तरह, हम भी टोकनाइज्ड सरकारी ऋण जैसे बाजार-आधारित तंत्रों को नियामकीय निगरानी के तहत खोज सकते हैं.
साथ ही, हमें बड़ी तस्वीर को पहचानना चाहिए. स्टेबलकॉइन इकोसिस्टम केवल वित्त के बारे में नहीं है यह फिनटेक का भविष्य है. यह भुगतान, डिजिटल वॉलेट, eKYC, ब्लॉकचेन इन्फ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, टैक्स कंप्लायंस और बचत व निवेश के नए रूपों को छूता है. हम इसे वैश्विक स्तर पर देख भी रहे हैं. एमिरेट्स एयरलाइंस, जो यूएई की प्रमुख एयरलाइन है, अब क्रिप्टोकरेंसी को भुगतान के रूप में स्वीकार करने के लिए तैयार है. यह इस बात का प्रमाण है कि डिजिटल एसेट्स अब सिर्फ सट्टा नहीं रह गए हैं, बल्कि असली दुनिया के वाणिज्य में सक्रिय रूप से एकीकृत हो रहे हैं. यह अब कोई हाशिये की इंडस्ट्री नहीं है यह वित्तीय सेवाओं और डिजिटल कॉमर्स का नया चेहरा बन रही है.
भारत के युवा डिजिटल नवाचार में वैश्विक नेता हैं. UPI,आधार और ONDC जैसी पहलों के माध्यम से हमने पहले ही आधारभूत ढांचा तैयार कर लिया है. लेकिन जब बात ब्लॉकचेन-आधारित वित्तीय उत्पादों की आती है, तो हमारे सबसे प्रतिभाशाली डेवलपर्स और स्टार्टअप्स को नियामकीय अस्पष्टता का सामना करना पड़ता है या तो वे विदेश से संचालन करते हैं या छिपकर काम करते हैं. यह उन्हें मुख्यधारा में वापस लाने और राष्ट्रीय हित में योगदान देने का एक स्पष्ट अवसर है.
सुप्रीम कोर्ट ने भी हाल ही में इस क्षेत्र को विनियमित करने की आवश्यकता जताई है, जो अन्यथा भुगतान के क्षेत्र को “हवाला का परिष्कृत रूप” बना रहा है. बिना स्पष्ट नीति के, वैध फिनटेक नवाचार हाशिये पर अटका रहता है, जबकि गैर-नियंत्रित क्षेत्र बढ़ता जाता है. विनियमन केवल नियंत्रण के लिए नहीं होता यह वैधता, जवाबदेही और पैमाने के निर्माण के लिए होता है.
उचित विनियमन के साथ, यह क्षेत्र उच्च-वेतन, उच्च-कौशल वाले रोजगार उत्पन्न कर सकता है. घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित कर सकता है, और एक ऐसी इंडस्ट्री को औपचारिक बना सकता है. जिसमें पहले से ही भारतीय प्रतिभा की भरमार है. हमारे स्टार्टअप्स को सिंगापुर या दुबई जाकर प्रतिस्पर्धी उत्पाद बनाने की जरूरत नहीं होनी चाहिए. वे दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई से ऐसा कर सकें वो भी भारतीय कानून के पूर्ण समर्थन के साथ.
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आज, भारतीय परिवारों में से केवल 15 प्रतिशत ही म्युचुअल फंड जैसे औपचारिक बाजार चैनलों के माध्यम से निवेश करते हैं. हमारी अधिकांश घरेलू बचत अभी भी फिक्स्ड डिपॉजिट या सोने में जमा रहती है. यदि हमारे पास सरकारी बॉन्ड द्वारा समर्थित सुरक्षित, विनियमित डिजिटल एसेट्स हों, तो हम वित्तीय समावेशन को व्यापक बना सकते हैं, बेहतर रिटर्न दे सकते हैं, पूंजी बाजार को गहरा कर सकते हैं, और दीर्घकाल में घरेलू बचत की क्रय शक्ति को प्रभावित करने वाली मुद्रास्फीति को भी नियंत्रित कर सकते हैं.
वित्त मंत्रालय का आर्थिक मामलों का विभाग शीघ्र ही क्रिप्टो विनियमन पर अपनी बहुप्रतीक्षित परामर्श पत्र जारी करने वाला है. यह एक ऐतिहासिक अवसर है. हम एक ऐसा ढांचा बना सकते हैं जो भारतीय मूल्यों विश्वास, पारदर्शिता और स्थिरता को दर्शाता हो, और साथ ही फिनटेक की संभावनाओं को अपनाकर रोजगार सृजन, रुपये को मजबूत करने और हमारी अर्थव्यवस्था को आधुनिक बनाने में योगदान दे.
दुनिया इंतजार नहीं कर रही. अमेरिका स्टेबलकॉइन का उपयोग अपनी उधारी लागत को कम करने और वैश्विक वित्तीय प्रभाव को सुरक्षित करने के लिए कर रहा है. भारत के पास यहां एक स्पष्ट मौका है. पहले अनुकूलन करें और फिर नेतृत्व करें. एक मजबूत, दूरदर्शी विनियामक ढांचा यह सुनिश्चित करेगा कि हमारा फिनटेक भविष्य भारत में, भारत के लिए, और दुनिया के लिए निर्मित हो.
(लेखक बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं. उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में देश के कई बड़े मीडिया संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं. इसके साथ ही लेखक चुनावी विश्लेषक और एग्जिट पोल कराने वाली कंपनी जन की बात के संस्थापक भी हैं)
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