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देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं, तेल-गैस के लिए पैनिक न करें; चुनावों में घुसपैठियों पर रोक जरूरी : इन्द्रेश कुमार

Indresh Kumar: राजधानी दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति दर्शन सत्याग्रह मंडप में रविवार को आयोजित मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक और ईद मिलन समारोह ने सामाजिक सौहार्द और गंभीर राष्ट्रीय विमर्श का एक अनोखा संगम प्रस्तुत किया. यह आयोजन केवल त्योहार की औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश और दुनिया के मौजूदा हालात पर गहराई से चर्चा का मंच बन गया. कार्यक्रम की शुरुआत ईद की मुबारकबाद और आपसी गले मिलने के साथ हुई, जिससे पूरे माहौल में अपनापन और भाईचारे की झलक दिखाई दी. लेकिन कुछ ही समय बाद बातचीत का रुख बड़े मुद्दों की ओर मुड़ गया. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, तेल आपूर्ति को लेकर वैश्विक चिंता, और भारत की रणनीतिक स्थिति जैसे विषयों पर विस्तार से मंथन हुआ. इस मौके पर मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध को तत्काल बंद किए जाने का भी आह्वान किया.

मुख्य अतिथि इन्द्रेश कुमार ने जो बातें रखीं, उन्होंने पूरे आयोजन की दिशा और संदेश तय कर दिया. उन्होंने अपने संबोधन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि देश में संसाधनों की कोई कमी नहीं है और तेल-गैस को लेकर अनावश्यक पैनिक फैलाने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, “भारत आज आत्मविश्वास के साथ खड़ा है. दुनिया के कई हिस्सों में तनाव जरूर है, लेकिन हमें अपनी क्षमता पर भरोसा रखना चाहिए. सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.”

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट को लेकर चर्चाएं तेज हैं. बैठक में मौजूद विशेषज्ञों और वक्ताओं ने भी इस बात पर सहमति जताई कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी ऊर्जा नीति को मजबूत किया है. आयात के विविध स्रोत, रणनीतिक भंडारण और वैकल्पिक ऊर्जा पर बढ़ता जोर—इन सभी ने देश को अधिक आत्मनिर्भर बनाया है. इस कारण अचानक किसी संकट की स्थिति में भी भारत संभल सकता है और आम आदमी को घबराने की जरूरत नहीं है.

लोकतंत्र की मजबूती के लिए…जरूरी है

इसी क्रम में इन्द्रेश कुमार ने चुनावों का मुद्दा उठाते हुए एक और महत्वपूर्ण बयान दिया. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित हो. उन्होंने “घुसपैठियों” पर सख्ती से रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी देश की एकता और सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है.

उनके इस बयान के बाद बैठक में मौजूद अन्य वक्ताओं ने भी चुनावी शुचिता, राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता जैसे विषयों पर अपने विचार रखे. कई वक्ताओं ने कहा कि निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव केवल राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के हर वर्ग को इसमें अपनी भूमिका निभानी होगी.

कार्यक्रम में देश के भीतर बढ़ती सामाजिक दूरी और सोशल मीडिया के माध्यम से फैल रही गलत सूचनाओं पर भी चिंता जताई गई. वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में अफवाहें बहुत तेजी से फैलती हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव पैदा होता है. ऐसे में सही जानकारी, संवाद और जागरूकता ही इसका सबसे बड़ा समाधान है.

बड़ी संख्या में लोगों की रही भागीदारी

इस आयोजन में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रही, जिससे इसकी व्यापकता और महत्व स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुआ. देश के विभिन्न हिस्सों से आए बुद्धिजीवियों, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया.

इस अवसर पर विशेष रूप से जाकिर हुसैन (प्रशासक, हरियाणा वक्फ बोर्ड), मोहम्मद अफजाल (राष्ट्रीय संयोजक, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच), डॉ शाहिद अख्तर (कार्यवाहक अध्यक्ष, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान आयोग), डॉ शालिनी अली (सामाजिक कार्यकर्ता), डॉ माजिद तालिकोटी (मानद स्वास्थ्य आयुक्त, इंडिया-जीसीसी ट्रेड काउंसिल), कर्नल ताहिर मुस्तफा (रजिस्ट्रार, जामिया हमदर्द विश्वविद्यालय), कारी अबरार जमाल (अध्यक्ष, जमीयत हिमायतुल इस्लाम), पद्मश्री दिलशाद हुसैन (पद्मश्री सम्मानित), अफसर आलम (वाइस चांसलर, जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी), महताब आलम रिजवी (रजिस्ट्रार, जामिया मिल्लिया इस्लामिया), शम्स इकबाल (निदेशक, राष्ट्रीय उर्दू भाषा प्रोत्साहन परिषद), आचार्य यशी फुंतसोक (पूर्व उपाध्यक्ष, तिब्बती निर्वासित संसद), सैयद रज़ा हुसैन रिज़वी (पूर्व सदस्य, प्रेस काउंसिल), अबू बकर नकवी (पूर्व अध्यक्ष, राजस्थान वक्फ बोर्ड) और मज़ाहिर खान (पूर्व सदस्य, उत्तर प्रदेश मदरसा बोर्ड) सूफी शाह मलंग समुदाय से सैयद जियारत हक्कानी), डॉ रिजवान खान (हेड अंग्रेजी डिपार्टमेंट, अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी) जैसे प्रमुख गणमान्य उपस्थित रहे.

इन सभी अतिथियों ने अपने विचारों के माध्यम से समाज में भाईचारा, शिक्षा के प्रसार, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने पर जोर दिया. वक्ताओं ने रेखांकित किया कि जब समाज के अलग-अलग वर्ग एक मंच पर आकर संवाद करते हैं, तभी राष्ट्र के सामने खड़ी चुनौतियों का सही समाधान निकलता है.

भारत की असली ताकत उसके लोग हैं

डॉ शाहिद अख्तर ने कहा कि भारत की असली ताकत उसके लोग हैं और इसी ताकत के बल पर देश को हर क्षेत्र में आगे ले जाना है. उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा और संस्थागत विकास पर जोर देते हुए कहा कि अगर स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय मजबूत होंगे तो देश की नींव मजबूत होगी. उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर को विकास की रीढ़ बताते हुए कहा कि बेहतर सड़कें, आधुनिक शिक्षा संस्थान और डिजिटल सुविधाएं भारत को वैश्विक स्तर पर आगे ले जाएंगी. साथ ही उन्होंने वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इन संसाधनों का सही उपयोग शिक्षा और सामाजिक उत्थान के लिए किया जाना चाहिए, जिससे समाज के कमजोर वर्गों को सीधा लाभ मिले.

डॉ शालिनी अली ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को आगे बढ़ाने के लिए स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समरसता पर तेजी से काम करना होगा. उन्होंने कहा कि जब तक आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और रोजगार के अवसर नहीं मिलेंगे, तब तक विकास अधूरा रहेगा. उन्होंने महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि यही वर्ग देश को नई दिशा दे सकता है. उन्होंने समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) पर रचनात्मक और सकारात्मक संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि इससे देश में समानता और न्याय की भावना मजबूत होगी. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर हम सब मिलकर काम करें तो भारत को विश्वपटल पर सर्वोच्च स्थान तक पहुंचाना कोई कठिन काम नहीं है.

संकल्प पत्र किया गया साझा

इस अवसर पर एक विस्तृत “संकल्प पत्र” भी साझा किया गया, जो इस बैठक की खास पहचान बनकर उभरा. इसमें छुआछूत और भेदभाव खत्म करने, हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने, नशा मुक्त भारत बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने और सभी धर्मों के बीच भाईचारा मजबूत करने जैसे महत्वपूर्ण संकल्प शामिल थे.

संकल्प पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया कि देश को दंगा, हिंसा और आतंकवाद से मुक्त रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है. वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जब समाज एकजुट और जागरूक रहेगा, तभी देश मजबूत बनेगा और हर चुनौती का सामना कर सकेगा.

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर चर्चा

बैठक में “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य पर भी विस्तार से चर्चा हुई. वक्ताओं ने कहा कि अगर भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक समरसता पर समान रूप से ध्यान देना होगा. युवाओं की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कहा गया कि उन्हें सही दिशा और अवसर देना समय की सबसे बड़ी जरूरत है.

“ईद डिप्लोमेसी” के रूप में सामने आए इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि त्योहार केवल खुशियां मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि संवाद और समाधान के रास्ते खोलने का भी माध्यम बन सकते हैं.

सभी ने लिया सकारात्मक माहौल बनाने का संकल्प

अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह संकल्प लिया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जाकर समाज को जोड़ने, भाईचारा बढ़ाने और सकारात्मक माहौल बनाने का काम करेंगे. कार्यक्रम का समापन “जय हिंद, जय भारत” के नारों और आपसी शुभकामनाओं के साथ हुआ.

ये भी पढ़ें- पीएम मोदी ने केरल में फूंका चुनावी बिगुल! LDF-UDF पर साधा निशाना; इस बार दिखेगी बदलाव की लहर?

राजघाट पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक ईद मिलन समारोह नहीं रहा, बल्कि एक ऐसा सशक्त मंच बना जहां ऊर्जा सुरक्षा से लेकर चुनावी पारदर्शिता और सामाजिक एकता तक—हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर गंभीर और सार्थक चर्चा हुई. यही वजह है कि इन्द्रेश कुमार के बयान इस खबर की हेडलाइन को पूरी तरह सार्थक, प्रभावी और समयानुकूल बनाते हैं.

-भारत एक्सप्रेस

Dr. Khalid Raza Khan

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