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क्या ISI की एजेंट हैं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई की पत्नी? सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने पाकिस्तान कनेक्शन को लेकर दिए तर्क

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई पर एक बार फिर निशाना साधा है. बुधवार को सरमा ने गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तान के प्रतिष्ठान से कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे. इसके बाद उन्होंने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक और पोस्ट कर गोगोई के बारे में कुछ और गंभीर आरोप लगाए हैं.

सीएम सरमा ने क्या कहा?

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने एक्स पर लिखा, “2015 में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने फर्स्ट टाइम एमपी (गौरव गोगोई) और उनके स्टार्टअप ‘पॉलिसी फर यूथ’ को भारत-पाकिस्तान संबंधों पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान उच्चायुक्त कार्यालय में आमंत्रित किया था. खास बात यह थी कि यह सांसद उस समय विदेश मामलों की संसदीय समिति का हिस्सा नहीं थे, इसलिए उनके उद्देश्य पर सवाल उठते हैं. यह यात्रा भारत के पाकिस्तान उच्चायुक्त के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप के खिलाफ ( खासकर हुर्रियत कांफ्रेंस के साथ उनके संबंधों को लेकर) आधिकारिक विरोध के बावजूद हुई थी. इन चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए, सांसद ने 50-60 युवा भारतीयों को पाकिस्तानी अधिकारियों से मिलने के लिए भेजा.”

सरमा ने आगे कहा कि इसके तुरंत बाद, उनके स्टार्टअप ने द हिंदू में एक लेख प्रकाशित किया जिसमें सीमा सुरक्षा बल द्वारा अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों से निपटने की आलोचना की गई थी. उनके संसदीय प्रश्नों की गहन जांच से पता चला कि उनका ध्यान संवेदनशील रक्षा मामलों पर बढ़ रहा है, जिनमें तटरक्षक रडार प्रतिष्ठानों, भारत के हथियार कारखानों, वैमानिकी रक्षा, ईरान के साथ व्यापार के लिए पारगमन मार्गों, कश्मीरी छात्रों और चर्चों पर कथित हमलों के बारे में पूछताछ शामिल है – जो उनके रुचि के क्षेत्रों में एक उल्लेखनीय बदलाव को दर्शाता है.

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इसके अलावा, सरमा ने गोगोई की शादी को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आगे लिखा, “दिलचस्प बात यह है कि ये घटनाक्रम एक ब्रिटिश नागरिक से विवाह के तुरंत बाद घटित हुआ, जिसकी व्यावसायिक पृष्ठभूमि और भी प्रश्न उठाती है. अपनी शादी से पहले, उन्होंने एक अमेरिकी सीनेटर के लिए काम किया था, जो पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के साथ घनिष्ठ संबंधों के लिए जाने जाते थे और बाद में उन्होंने पाकिस्तान में कुछ समय बिताया, जहां वे एक ऐसे संगठन में कार्यरत थीं, जिसके बारे में व्यापक रूप से माना जाता है कि वह इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) का मुखौटा है. इन घटनाओं का समय सांसद के उभरते राजनीतिक रुख और कार्यों में एक और रहस्य की परत जोड़ता है.”

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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