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ISRO: नए साल के पहले दिन इसरो ने रचा इतिहास, XPoSAT की सफल लॉन्चिंग के साथ दुनिया का दूसरा देश बना भारत, सैटेलाइट खोलेगा ब्रह्मांड के राज

ISRO: नए साल 2024 के पहले दिन यानी कि 1 जनवरी को इसरो ने इतिहास रचते हुए XPoSAT की सफल लॉन्चिंग कर दी है. सोमवार को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से XPoSAT सैटेलाइट को लॉन्च किया गया. यह सैटेलाइट अंतरिक्ष में होने वाले रेडिएशन का अध्ययन करेगा. उनके सभी स्त्रोतों की तस्वीरें लेकर इसरो को भेजेगा.

650 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात होगा सैटेलाइट

इस सैटेलाइट में लगे टेलिस्कोप को रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने तैयार किया है, जो यूनिवर्स के 50 सबसे ज्यादा चमकने वाले स्त्रोतों की स्टडी करने के साथ ही उनकी तस्वीरें लेगा. जैसे- पल्सर, ब्लैक होल एक्स रे बाइनरी, एक्टिव गैलेक्टिव न्यूक्लिआई, नॉन थर्मल सुपरनोवा शामिल हैं. सैटेलाइट को इसरो 650 किलोमीटर की ऊंचाई पर तैनात किया जाएगा.

मिशन की शुरुआत इसरो ने साल 2017 में की थी

बता दें कि इस मिशन की शुरुआत इसरो ने साल 2017 में की थी, मिशन की लागत 9.50 करोड़ रुपये है. एक्सपोसैट सैटेलाइट लॉन्च होने के 22 मिनट बाद अपनी कक्षा में तैनात हो जाएगा. सैटेलाइट में दो पैलोड्स दिए गए हैं. पहला POLIX और दूसरा XSPECT है.

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट ने किया है तैयार

ISRO की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एक्सपोसैट सैटेलाइट में POLIX मेन पेलोड है. इसे रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट और यूआर राव सैटेलाइट सेंटर ने संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया है. इसका वजन 126 किलोग्राम है. एक्सपोसैट सैटेलाइट स्पेस में स्त्रोतों के मैग्नेटिक फील्ड, रेडिएशन, इलेक्ट्रॉन्स का अध्ययन करेगा. इसके अलावा पोलिक्स स्पेस में मौजूद 50 में से 40 सबसे ज्यादा चमकने वाली चीजों की स्टडी करेगा. XSPECT मतलब एक्स-रे स्पेक्ट्रोस्कोपी एंड टाइमिंग. यह 0.8-15 keV रेंज की एनर्जी बैंड की स्टडी करेगा.

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20 सितंबर 1993 को हुई थी पहली उड़ान

इसरो ने बताया कि यह PSLV की 60वीं उड़ान है. जबकि PSLV-DL की चौथी उड़ान है. इस रॉकेट का वजन 320 टन का होता है और ऊंचाई 44.4 मीटर है. यह 4 स्टेज का 2.8 मीटर व्यास वाला रॉकेट है. इसकी पहली उड़ान 20 सितंबर 1993 को हुई थी, उस दौरान इसने कई देसी और विदेशी सैटेलाइट्स को लॉन्च किया था.

-भारत एक्सप्रेस

Shailendra Verma

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