कश्मीर घाटी में कड़ाके की ठंड का सबसे कठिन दौर शुरू हो चुका है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘चिल्लई कलां’ कहा जाता है. इस साल 21 दिसंबर 2025 से इसकी शुरुआत हो गई है और अगले 40 दिनों तक कश्मीर के लोगों को भीषण शीतलहर और भारी बर्फबारी का सामना करना पड़ेगा. चिल्लई कलां के शुरू होते ही कश्मीर के ऊंचे पहाड़ों से लेकर निचले इलाकों तक सफेद चादर बिछ गई है.
‘चिल्लई कलां’ एक फारसी शब्द है, जिसका हिंदी में मतलब होता है ‘बड़ी सर्दी’. यह साल का वह समय होता है जब कश्मीर में ठंड अपने चरम पर होती है. इसकी अवधि हर साल 21 दिसंबर से शुरू होकर 29 जनवरी तक चलती है. इन 40 दिनों के दौरान आसमान से लगातार बर्फ गिरती है और बर्फीली हवाएं चलती हैं, जिससे तापमान गिरकर शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है.
इस दौरान कड़ाके की ठंड का असर ऐसा होता है कि नदियां, झरने और झीलों का पानी बर्फ में तब्दील हो जाता है. घरों में नलों के भीतर भी पानी जम जाता है, जिससे लोगों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. खेतों से लेकर पेड़ों तक, हर तरफ केवल बर्फ ही बर्फ नजर आती है. बर्फबारी की वजह से सड़कों पर आवाजाही रुक जाती है और जनजीवन पूरी तरह प्रभावित होता है.
40 दिन के चिल्लई कलां के खत्म होने के बाद ठंड पूरी तरह खत्म नहीं होती. इसके बाद 20 दिनों का ‘चिल्लई खुर्द’ (छोटी सर्दी) और फिर 10 दिनों का ‘चिल्लई बच्चा’ (बच्चा सर्दी) का दौर आता है. 19 फरवरी से 28 फरवरी के बीच ‘बेबी कोल्ड’ का असर रहता है, हालांकि इस दौरान मौसम में थोड़ी नमी आने लगती है और सूरज की हल्की तपिश महसूस होने लगती है.
फिलहाल, प्रशासन ने लोगों को एहतियात बरतने की सलाह दी है और बर्फ हटाने के लिए मशीनों को तैनात कर दिया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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