कश्मीर में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को फिर धमकी
रिपोर्ट – रवि शर्मा/जम्मू
Kashmiri Pandit Employees Terror Threat: कश्मीर घाटी में आतंकवादियों ने एक बार फिर कश्मीरी पंडितों और अल्पसंख्यक कर्मचारियों को निशाना बनाने की नापाक साजिश शुरू कर दी है. जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के डिजिटल ऑफशूट ‘यूनाइटेड लिबरेशन काउंसिल’ (ULC) ने घाटी में तैनात कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को बेहद खौफनाक और सीधी धमकी दी है.
केवल एक महीने के भीतर यह लगातार 8वीं ऐसी धमकी सामने आई है. इस बार आतंकियों ने सिर्फ हवा में धमकियां नहीं दी हैं बल्कि इंटरनेट पर कर्मचारियों के निजी मोबाइल नंबर, घर के पते और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर तक लीक कर दिए हैं, जिससे पूरे समुदाय में खौफ और सुरक्षा को लेकर गहरा संकट पैदा हो गया है.
आतंकी संगठन ULC द्वारा जारी किए गए ताजा पत्र में पीएम डेवलपमेंट पैकेज (PM Package) के तहत कार्यरत लगभग 7,000 कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को सीधा निशाना बनाया गया है. खत में कर्मचारियों को तुरंत अपनी नौकरियां छोड़कर वापस लौटने या “गंभीर परिणाम” भुगतने की खुली चेतावनी दी गई है.
यही नहीं पत्र में बेहद आक्रामक भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा गया है कि “गोलियां अपने निशाने तक पहुंचेंगी” और “बॉडी बैग्स (शव) उनके पैतृक स्थानों पर भेजे जाएंगे”. इस सीधे हमले ने 1990 के उस दौर की काली यादें ताजा कर दी हैं जब पोस्टरों के जरिए अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता था.
सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, आतंकवादी अब जमीनी हमलों के साथ-साथ ‘डिजिटल टेरर’ और ‘साइकोलॉजिकल वॉरफेयर’ (मानसिक दबाव) का सहारा ले रहे हैं. इंटरनेट पर कश्मीरी पंडितों और उनके परिवारों की निजी जानकारियां सार्वजनिक कर (Data Breach) आतंकी उनके भीतर लगातार डर का माहौल बनाए रखना चाहते हैं.
बताते चलें इस बड़े डेटा लीक के बाद कर्मचारियों के संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और साइबर क्राइम विंग से तुरंत एफआईआर दर्ज कर उच्चस्तरीय सुरक्षा ऑडिट कराने की गुहार लगाई है.
ज्ञात रहे इस ताजा धमकी (Kashmiri Pandit Terror Threat) ने उन हजारों कश्मीरी पंडितों की सुरक्षा पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है जो सालों बाद केंद्र सरकार के पुनर्वास पैकेज के तहत घाटी में वापस लौटकर विभिन्न सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं.
धमकियों का सिलसिला शुरू होने के बाद कई संवेदनशील इलाकों में कार्यरत कर्मचारी छुट्टियों पर जाने को मजबूर हो गए हैं. कर्मचारी संघों का कहना है कि ट्रांजिट कॉलोनियों और किराए के मकानों में रह रहे कर्मचारियों के पते आतंकियों के पास पहुंचना एक बेहद गंभीर सुरक्षा चूक है.
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लगातार मिल रही धमकियों और सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहे खतों को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं. खुफिया एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस डेटा ब्रीच का जरिया क्या कोई सरकारी विभाग है या फिर आतंकियों ने किसी स्लीपर सेल के जरिए यह प्रोफाइलिंग की है. धमकियों के डिजिटल ट्रेल, आईपी एड्रेस और सोशल मीडिया हैंडल ‘अहमद बिलाल’ की गहनता से पड़ताल की जा रही है, साथ ही संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा गश्त बढ़ा दी गई है.
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-भारत एक्सप्रेस
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