पीएम नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की पीएम शेख हसीना.
India-Bangladesh Land Boundary Agreement: कच्चातीवु द्वीप को लेकर भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे पर हमलावर है. पहले इस मामले में पीएम मोदी और उसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कांग्रेस की आलोचना की. इसके बाद कांग्रेस ने पलटवार करते हुए चीन सीमा विवाद को लेकर पीएम मोदी से सवाल पूछे. इस बीच कांग्रेस ने भाजपा पर नया आरोप लगा दिया है. कांग्रेस ने कहा कि भाजपा सरकार ने आज से 9 साल पहले बांग्लादेश के साथ हुए लैंड एग्रीमेंट में बांग्लादेश को ज्यादा जमीन दे दी. ऐसे में आइये जानते हैं क्या है लैंड एग्रीमेंट और कांग्रेस के आरोपों में कितनी है सच्चाई?
साल 1971 में बांग्लादेश को आजादी दिलाने में भारत ने अहम भुमिका निभाई थी. इसके बाद दोनों देशों में बाॅर्डर को लेकर विवाद गहराने लगा. आपको ये पता होना जरूरी है भारत से ही पहले पाकिस्तान बना और फिर बांग्लादेश. बंटवारे के समय तकनीकी समस्याओं के कारण तारबंदी नहीं हो पाई. दोनों देशों की सीमाओं के बीच कई हिस्से ऐसे थे जो उन पर पूरा दावा नहीं कर पा रहे थे. ऐसे में ये मामले लंबित की श्रेणी में आ गए.
साल 1974 में तत्कालीन इंदिरा सरकार के दौरान लैंड बाउंड्री एग्रीमेंट हुआ. ये समझौता पुराने मामलों को सुलझाने के लिए ही किया गया था. लेकिन एग्रीमेंट सदन में पारित नहीं कराया गया. इसमें 160 गलियारे ऐसे थे जिन्हें दोनों देशों को आदान-प्रदान करना था. बांग्लादेश ने इस एग्रीमेंट को कन्फर्म भी कर दिया था. लेकिन भारत खामोश रहा. क्योंकि इस पर सहमति का मतलब था जमीनों का बंटवारा. इसके बाद 2011 में मनमोहन सरकार ने इस विवाद में दिलचस्पी दिखाई और दोनों देशों के बीच नए सिरे से समझौता हुआ. इस दौरान सहमति बनी कि बांग्लादेश भारत को पौने 3 हजार एकड़ जमीन देगा. वहीं भारत लगभग सवा 2 हजार एकड़ जमीन ढाका को देगा. लेकिन तब भी डील साइन नहीं हो सकी.
इसके बाद 2015 में मोदी सरकार ने सीमा विवाद को सुलझाने में तेजी दिखाई. इससे पहले सरकार ने बंगाल की ममता सरकार और जमीन के सभी पक्षकारों से बात की. नए करार के तहत 162 जगहों का लेनदेन हुआ. इसमें 111 जगहें भारत ने बांग्लादेश को दीं. जो कि 17 हजार एकड के आसपास था. वहीं बदले में बांग्लादेश ने भारत को 51 इलाके दिए. जो 7 हजार एकड़ के आसपास थे. इस तरह जमीन के हिसाब से बात की जाए तो 10 हजार एकड़ जमीन हमें कम मिली. लेकिन सरकार का इसके पीछे तर्क था कि हमें जो 7 हजार एकड़ जमीन मिली वो 10 हजार एकड़ की तुलना में अधिक सामरिक है और उसकी उपयोगिता भी कुछ और है.
बता दें कि इस दौरान नागरिकों की भी अदला-बदली की गई. भारत ने 14 हजार बांग्लादेशियों को नागरिकता दी. वहीं बांग्लादेश ने 36 हजार भारतीयों को नागरिकता दी. गौरतलब है कि दोनों देश लगभग 4 हजार किमी. की सीमा शेयर करते हैं. आजादी के समय आज का बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान था. ऐसे में उस समय भौगोलिक स्थितियों के कारण बंटवारा उतना आसान नहीं था. कच्चातिवु द्वीप को लेकर घिरी कांग्रेस ने सोमवार को बांग्लादेश के साथ हुए लैंड एग्रीमेंट का मुद्दा उठाया और मोदी सरकार पर निशाना साधा.
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