केरल के वायनाड जिले में आए विनाशकारी भूस्खलन का दृश्य. (फोटो: IANS)
केरल के वायनाड जिले में मेप्पाडी के पास पहाड़ी इलाकों में हुए विनाशकारी भूस्खलन के बाद गुरुवार (1 अगस्त) सुबह तक मरने वालों की संख्या 276 हो गई है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं.
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पुष्टि की है कि 240 लोग लापता हैं, जबकि प्रभावित इलाकों से 1,500 से ज़्यादा लोगों को बचाया गया है. इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल कन्नूर एयरपोर्ट पर पहुंच गए हैं. वे प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए राहत शिविरों और मेडिकल कॉलेज का दौरा करेंगे.
मुख्यमंत्री विजयन की अध्यक्षता में एक सर्वदलीय बैठक जिले में होगी, क्योंकि खोज और बचाव अभियान जारी है, जिसमें विभिन्न एजेंसियां और सशस्त्र बल शामिल हैं. सेना ने बचाव प्रयासों में तेजी लाने के लिए मुंडक्कई में एक बेली ब्रिज का निर्माण किया है. मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि वायनाड में 45 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं, जो 3,000 से अधिक विस्थापित व्यक्तियों को आश्रय प्रदान कर रहे हैं.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा, ‘हमें अभी भी कुछ लोगों को बचाने की उम्मीद पर ध्यान केंद्रित करना होगा. दो गांव नक्शे से गायब हो गए हैं, यह बहुत गंभीर संकट है. इसलिए हमें प्राथमिकता के आधार पर देखना चाहिए कि आप किसे बचा सकते हैं. फिर आप राजनीति कर सकते हैं. गृह मंत्री ने कहा है कि चेतावनी दी गई थी, लेकिन मुख्यमंत्री ने कहा है कि चेतावनी पर्याप्त गंभीर नहीं थी, यह एक ग्रीन या ऑरेंज अलर्ट था, न कि रेड अलर्ट. इन सभी पर बाद में बहस की जा सकती है.’
थरूर ने बताया कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से वायनाड भूस्खलन को एमपीएलएडी दिशानिर्देशों के तहत ‘गंभीर प्रकृति की आपदा’ घोषित करने का अनुरोध किया है.
सोशल साइट एक्स पर तिरुवनंतपुरम के सांसद थरूर ने केंद्रीय गृह मंत्री को लिखे अपने पत्र की एक प्रति साझा की, जिसमें उन्होंने अपने अनुरोध पर तत्काल कार्रवाई करने का आग्रह किया. अगर अनुरोध को मंजूरी मिल जाती है, तो संसद सदस्यों को वायनाड के प्रभावित जिलों और क्षेत्रों के लिए अपने एमपीएलएडी फंड से 1 करोड़ रुपये तक के कार्यों की सिफारिश करने की अनुमति मिल जाएगी, जो दो बड़े भूस्खलनों से प्रभावित हुआ था.
बीते 30 जुलाई की रात को केरल के वायनाड जिले में विनाशकारी भूस्खलन की एक श्रृंखला ने तबाही मचाई, जिसमें तत्काल 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. अब भी अनगिनत लोग मलबे के नीचे दबे हुए लापता हैं.
-भारत एक्सप्रेस
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