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राजधानी में गूंजेगी नेतृत्व की आवाज, महासम्मेलन से मिलेगी भविष्य को नई दिशा

राष्ट्रीय राजधानी 27 सितम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनेगी, जब तालकटोरा इनडोर स्टेडियम मुस्लिम नेतृत्व के सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक का मंच बनेगा. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) द्वारा आयोजित “अखिल भारतीय मुस्लिम महासम्मेलन 2025” को ऐसा निर्णायक आयोजन माना जा रहा है, जो मुस्लिम नेतृत्व के भविष्य की रूपरेखा तैयार करेगा, सामाजिक और राष्ट्रीय सुधारों की दिशा तय करेगा और नई पीढ़ी को राष्ट्र निर्माण की यात्रा में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित करेगा.

नेतृत्व की नई रणनीति बनाना है उद्देश्य

सम्मेलन में भागीदारी का पैमाना अभूतपूर्व है, जहां लगभग 10,000 प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है, जिनमें देशभर से बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा नेता और राष्ट्रीय हस्तियां शामिल होंगी. महिलाओं की बड़ी संख्या में भागीदारी की संभावना है, जो मुस्लिम समाज के लिए एक नई और समावेशी दृष्टि का संकेत है. सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य मुस्लिम नेतृत्व की नई रणनीति बनाना, राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर चर्चा करना, सामाजिक सुधार को बढ़ावा देना और एक ठोस एवं क्रियान्वित की जा सकने वाली रूपरेखा तैयार करना है, जिससे समुदाय की आकांक्षाओं को भारत की विकास यात्रा से जोड़ा जा सके.

आरएसएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और एमआरएम के मुख्य संरक्षक श्री इंद्रेश कुमार को इस ऐतिहासिक आयोजन के पीछे की सोच और दर्शन का मार्गदर्शक माना जाता है. उनके नेतृत्व में मुस्लिम बुद्धिजीवी, विद्वान और कार्यकर्ता एकजुट होकर मुस्लिम समाज के भविष्य और एक मज़बूत, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील भारत में उसकी भूमिका पर सामूहिक रूप से विचार कर रहे हैं. यह सम्मेलन संवाद और सहमति निर्माण के नए युग की शुरुआत करेगा, जिससे मुस्लिम समाज के सामने आने वाली चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान निकलेंगे और भारत को एकजुट और समावेशी राष्ट्र के रूप में मज़बूत करने में मदद मिलेगी.

सम्मेलन समुदाय की यात्रा में नया मोड़

राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने इस सम्मेलन को समुदाय की यात्रा में एक मोड़ बताया. उन्होंने कहा, “यह महा सम्मेलन मुस्लिम समाज में आत्मविश्वास, सकारात्मकता और राष्ट्रभक्ति की नई ऊर्जा भरेगा. यह सही नेतृत्व की दिशा दिखाएगा और युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेगा. तालकटोरा स्टेडियम से उठने वाली यह आवाज़ पूरे भारत में गूंजेगी.”उन्होंने आगे कहा कि एमआरएम हमेशा ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ के सिद्धांत पर खड़ा रहा है और इस आयोजन से निकलने वाले प्रस्ताव और संकल्प भाईचारे, सौहार्द और विकास को गति देंगे तथा समुदाय की भागीदारी को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ने के लिए नई ऊर्जा देंगे.

राष्ट्रीय संयोजक एवं प्रमुख शिक्षाविद् डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा, “यह महासम्मेलन केवल एक जुटान नहीं बल्कि एक आंदोलन है, जो मुस्लिम समाज को शिक्षा, सशक्तिकरण और समानता की दिशा में पुनः केंद्रित करेगा. यह समय है कि समाज प्रगतिशील सुधारों को अपनाए, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर ध्यान दे और 2047 तक विकसित भारत के सपने में योगदान दे. यहां होने वाली चर्चाएं आने वाली पीढ़ियों के शैक्षिक सशक्तिकरण और उत्थान की नींव रखेंगी.”

महिला विंग की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने सम्मेलन की समावेशी प्रकृति पर जोर देते हुए कहा, “महिलाएं हर समाज की शक्ति और रीढ़ होती हैं. यह सम्मेलन सुनिश्चित करेगा कि मुस्लिम महिलाओं की आवाज़ सुनी जाए और वे सामाजिक सुधार और निर्णय-निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएं. शिक्षा से लेकर उद्यमिता तक, अधिकारों से लेकर जिम्मेदारियों तक, महिलाएं आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी समाज के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएंगी.”

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच कई आंदोलनों में रहा है आगे

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का इतिहास राष्ट्र के महत्वपूर्ण मुद्दों में अहम भूमिका निभाने का रहा है. ट्रिपल तलाक की समाप्ति से लेकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, अनुच्छेद 370 और 35A के हटने तक, पीएफआई पर प्रतिबंध, वक्फ संशोधन विधेयक का समर्थन, तिरंगा यात्राओं का आयोजन, आतंकवाद विरोधी अभियान, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की मुक्ति की वकालत, और अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा — एमआरएम हमेशा राष्ट्रीय आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति में रहा है. यह सम्मेलन उस विरासत को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम नेतृत्व को और संगठित एवं सुधारोन्मुख दिशा देने का प्रयास करेगा.

जैसे-जैसे तैयारियां पूरी होने के करीब हैं, आयोजन के पैमाने और प्रभाव को लेकर जिज्ञासा बढ़ती जा रही है. राष्ट्रीय स्तर के प्रमुख नेताओं, विचारकों और नीति-निर्माताओं की उपस्थिति से सम्मेलन की गंभीरता और बढ़ने की संभावना है. कई लोग इसे मुस्लिम समाज के लिए एक ऐतिहासिक अवसर बता रहे हैं — ऐसा अवसर जो दूरदर्शी सोच, रचनात्मक भागीदारी और राष्ट्र निर्माण की नई ऊर्जा से भरे हुए भविष्य का मार्ग प्रशस्त करेगा. जब कल तालकटोरा से आवाज़ उठेगी, तो यह संभव है कि यह भारत में मुस्लिम नेतृत्व के लिए एक नए युग की शुरुआत का संकेत दे — एक ऐसा युग जो राष्ट्रभक्ति, प्रगतिशील सोच और मज़बूत, एकजुट भारत के साझा सपने के प्रति प्रतिबद्धता से परिपूर्ण होगा.

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-भारत एक्सप्रेस

Dr. Khalid Raza Khan

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