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दो दशक से आरएसएस और मुसलमानों के बीच चल रहे संवाद की कहानी, जिसे दुनिया के लिए जानना ज़रूरी है। आरएसएस के बारे में जो कहा जाता है, उसे सुनना ज़रूरी है। लेकिन आरएसएस के साथ काम करने वाले मुसलमानों को भी सुनना उतना ही ज़रूरी है। किसी संगठन की पूरी तस्वीर केवल उसके आलोचकों से बात करके नहीं मिल सकती। उसके साथ काम करने वालों के अनुभव भी उस तस्वीर का हिस्सा होते हैं।

असम में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) ने आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के संरक्षक डॉ. इन्द्रेश कुमार की अध्यक्षता में हुए सम्मान समारोह में प्रो. शाहिद अख़्तर ने नौजवानों को किया सम्मानित, होनहार छात्रों को कहा— 'आप ही भारत का कल हैं, विकसित भारत 2047 की ज़िम्मेदारी आपके कंधों पर'

डॉ. इंद्रेश कुमार: "किसी भी समुदाय का भविष्य उसके द्वारा चुने गए आदर्शों पर निर्भर करता है"; कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा ने सद्भाव, देशभक्ति और साझा उत्तरदायित्व के लिए ऐतिहासिक बौद्धिक आंदोलन की रचना की

न भूलेंगे, न छोड़ेंगे: पहलगाम की बरसी पर आतंक के खिलाफ मुस्लिम राष्ट्रीय मंच का फूटा आक्रोश, अगर पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद ने दोबारा सिर उठाया, तो जवाब पहले से ज्यादा कड़ा और निर्णायक होगा। इंद्नेश कुमार ने कहा कि यह कार्रवाई पहलगाम के हर पीड़ित के आंसू का जवाब है।

राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रप्रेम की भावना को समर्पित नई पुस्तक 'भारतीय मुस्लिमों की गौरव गाथाएं' में कर्नल ताहिर मुस्तफ़ा के जीवन और योगदान को उजागर किया गया है.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने अपने 24वें स्थापना दिवस पर दिल्ली के पहाड़गंज कार्यालय में राष्ट्रीय बैठक आयोजित की, जिसमें देशभर से लगभग 1000 कार्यकर्ताओं ने भाग लिया. मंच ने सभी धर्मों का सम्मान और मानवता के पक्ष में आवाज उठाने का संदेश दिया.

राष्ट्रीय राजधानी 27 सितम्बर 2025 को एक ऐतिहासिक क्षण की गवाह बनेगी, जब तालकटोरा इनडोर स्टेडियम मुस्लिम नेतृत्व के सबसे महत्वपूर्ण सम्मेलनों में से एक का मंच बनेगा.

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की विशेष बैठक में पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्त भारत और वैश्विक शांति जैसे विषयों पर ऐतिहासिक संकल्प लिए गए

मुस्लिम राष्ट्रीय मंच द्वारा आयोजित भव्य ईद मिलन समारोह में वक्फ संशोधन कानून को लेकर देशभर से आए नेताओं, बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और धर्मगुरुओं ने एक स्वर में इसे मुस्लिम समाज के लिए एक ऐतिहासिक और परिवर्तनकारी कदम बताया.